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6 साल की मेहनत, ₹35 लाख की कमाई! राष्ट्रपति तक पहुंचा दंतेवाड़ा की बिहान दीदी का हुनर

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दंतेवाड़ा :  छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल की पारंपरिक कला और ग्रामीण महिलाओं की मेहनत ने एक बार फिर राष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाई है। दंतेवाड़ा जिले की बिहान दीदी रामबती पोड़ियाम ने बस्तर दशहरा के अवसर पर आयोजित मुरिया दरबार में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को बेल मेटल से निर्मित बस्तर कला की आकर्षक कलाकृति भेंट की। उनकी इस उपलब्धि से जिले की ग्रामीण महिलाओं के हुनर और आत्मनिर्भरता को नई पहचान मिली है।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ीं रामबती पोड़ियाम विकासखंड गीदम के ग्राम झोड़ियाबाड़म की निवासी हैं। जिला दंतेवाड़ा की ओर से राष्ट्रपति को कलाकृति भेंट करने का अवसर उनके लिए ही नहीं, बल्कि जिले की पारंपरिक कला और महिला उद्यमिता के लिए भी गौरव का क्षण बना।

छिंद के पत्तों से तैयार करती हैं गुलदस्ते, राखियां और मालाएं

रामबती पोड़ियाम पिछले छह वर्षों से बिहान योजना से जुड़कर आजीविका बढ़ाने की दिशा में लगातार काम कर रही हैं। जिला प्रशासन के मार्गदर्शन और सहयोग से वह छिंद के पत्तों से आकर्षक गुलदस्ते, राखियां, मालाएं और विभिन्न सजावटी कलाकृतियां तैयार करती हैं।

अपने हुनर, रचनात्मकता और मेहनत के दम पर रामबती ने पिछले छह वर्षों में इन उत्पादों की बिक्री से लगभग 35 लाख रुपये की आय अर्जित की है। स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर उत्पाद तैयार करने और उन्हें बाजार तक पहुंचाने का उनका प्रयास स्वरोजगार की एक प्रेरक मिसाल बन गया है।

ग्रामीण महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा

रामबती की सफलता बताती है कि पारंपरिक कला और स्थानीय संसाधन ग्रामीण महिलाओं के लिए आजीविका का मजबूत माध्यम बन सकते हैं। सही मार्गदर्शन, निरंतर मेहनत और स्वरोजगार के अवसरों से महिलाएं अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ परिवार और समाज में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को बस्तर कला की कलाकृति भेंट किए जाने से दंतेवाड़ा की कला और ग्रामीण महिलाओं की प्रतिभा को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने का अवसर मिला। रामबती पोड़ियाम की उपलब्धि जिले की उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो अपने हुनर को रोजगार में बदलकर आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं।

बिहान योजना से जुड़ी रामबती की कहानी यह संदेश देती है कि स्थानीय कला, उपलब्ध संसाधनों और मेहनत के सहारे गांवों में भी आर्थिक सशक्तीकरण की नई राह बनाई जा सकती है।

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