विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कम सोडियम वाले नमक खाने की अपील की है. इसमें कहा गया है कि खाने में सामान्य टेबल साल्ट की जगह पोटेशियम युक्त कम सोडियम वाले नमक का इस्तेमाल किया जाए. यह सिफारिश सिर्फ वयस्कों और स्वस्थ व्यक्तियों के लिए की गई है. गर्भवती महिलाओं, बच्चों और किडनी से जुड़ी समस्याओं वाले लोगों को सामान्य नमक खाने की सलाह दी गई है. इन्हें कम सोडियम वाला नमक नहीं खाना है. बता दें कि डब्ल्यूएचओ पहले ही सोडियम की खपत को 2 ग्राम प्रतिदिन कम करने की सिफारिश कर चुका है.
विशेषज्ञों ने डब्ल्यूएचओ के सुझाव को सराहा
विश्व स्वास्थ्य संगठन की इस सिफारिश को विशेषज्ञों ने सराहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन भारतीय लोगों के लिए अधिक उपयोगी है. क्योंकि भारतीय लोगों में अलग से नमक खाने की आदत है. भारतीयों में टेबल पर नमक का डिब्बा लेकर बैठने की प्रवृति पुरानी है. भोजन करने से पहले भारतीय नमक का अधिक इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में स्वास्थ्य संगठन का यह फैसला भारतीयों के लिए महत्वपूर्ण है. भारतीय लोगों को इसको ध्यान में रखना चाहिए.
अधिक नमक का सेवन है ‘जहर’
बता दें कि अधिक नमक खाना संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए जहर खाने के बराबर है. नमक खाने से ब्लड प्रेशर तेजी से बढ़ता है. इससे हार्ट अटैक और हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ सकता है. इसके अलावा अधिक नमक का इस्तेमाल व्यक्ति के किडनी, लिवर और खून को भी प्रभावित करता है. अधिक नमक के सेवन से नसों में पानी की मात्रा बढ़ जाती है. इससे कई तरह के रोग हो सकते हैं. ऐसे में विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडलाइन को भारतीय लोगों को पालन करना चाहिए.



