Home छत्तीसगढ़ कोटाडोल में धूमधाम से मनाई गई बसंत पंचमी

कोटाडोल में धूमधाम से मनाई गई बसंत पंचमी

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मनेन्द्रगढ़/कोटाडोल :  एमसीबी जिले में वसंत पंचमी का त्योहार धूमधाम से मनाया गया। सभी ने मां सरस्वती के छायाचित्र और प्रतिमाओं के समक्ष पीले पुष्प चढ़ाकर पूजा अर्चना की। एमसीबी जिले के कोटाडोल में मां शकुंतला कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन कोटाडोल में भी बसंत पंचमी का पर्व हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस शुभ अवसर कालेज की छात्र छात्राओं और शिक्षकों द्वारा मां

सरस्वती की पूरे विधिविधान से पूजा अर्चना की गई। कॉलेज के छात्रों, शिक्षकों और स्टाफ ने विधिवत हवन और मंत्रोच्चारण के साथ ज्ञान और विद्या की देवी मां सरस्वती से आशीर्वाद की प्रार्थना की।

कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, भजन और श्लोक पाठ ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। कॉलेज प्रशासन ने छात्रों को शिक्षा और संस्कृति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बसंत पंचमी के संदेश को आत्मसात करने की प्रेरणा दी। पूरे परिसर में उत्सव का माहौल रहा और अंत में सभी को प्रसाद वितरित किया गया।

इस अवसर पर कालेज की प्राचार्य श्रीमती मनु नंदे ने बताया की संस्था की महिला श्रद्धालुओं ने मां सरस्वती को वस्त्र,सोलह शृंगार के साथ मां की पूजा की वही बच्चों ने शिक्षा की प्राप्ति के लिए मां के पास पैन और कापियां रख अपने घर ले गए। उन्होंने आगे कहा की मां सरस्वती की कृपा अपरंपरार है। वह कभी अपने भक्तों को निराश नहीं करती। हमें धर्म के मार्ग पर चलकर जीवन को सार्थक बनाने के लिए अच्छे कर्म करने चाहिए। बसंत पंचमी के अवसर पर मां सरस्वती की विशेष पूजन किए जाने की परंपरा है। इसी परंपरा को निभाते हुए कालेज में यह आयोजन किया गया।

श्रीमती मनु नंदे ने बसंत पंचमी के पर्व की महत्ता पर कहा की पौराणिक मान्यता है की मां सरस्वती की आराधना और ज्ञान के महापर्व को बसंत पंचमी के रूप में जाना जाता है। शिक्षा प्रारम्भ करने या किसी नई कला की शुरूआत करने के लिए यह दिन बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन लोग पीले रंग का वस्त्र पहनकर सरस्वती मां की पूजा करते हैं। बसंत पंचमी के दिन से ही बसंत ऋतु की शुरूआत होती है।

भारत में बसंत पंचमी के त्योहार को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। बसंत पंचमी के 40 दिन बाद होली का त्योहार मनाया जाता है। यह त्योहार ज्ञान, संगीत और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित रहता है। इस दिन स्कूलों और कॉलेजों के साथ-साथ मंदिरों में भी देवी सरस्वती की पूजा की जाती है।

भगवान विष्णु और कामदेव का पूजन

श्रीमती नंदे ने बताया की साल की छह ऋतुओं में बसंत के आगमन पर माघ शुक्ल पक्ष पंचमी पर्व पर भगवान विष्णु और कामदेव की पूजा भी की जाती है। विद्या, बुद्धिदाता, सरस्वती, वाघेश्वरी देवी, वीणा वादिनी, वाग्देवी आदि नामों से पूजा जाता है। संगीत की उत्पत्ति करने के कारण संगीत की देवी के जन्मोत्सव को भी वसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है। शिक्षाविद, विद्यार्थी ज्ञानवान होने की प्रार्थना इसी दिन करते हैं। इस विशेष दिन अबूझ मुहूर्त मानकर विद्यारंभ,अन्नप्राशन, विवाह, मुंडन गृह प्रवेश के शुभ कार्य भी किए जाते है।

बसंत पंचमी के अवसर पर ड्रीम वर्ल्ड पब्लिक इंग्लिश मीडियम स्कूल से कुमारी स्वेता, शीतल सिंह,शकुंतला, रागिनी, सुनील सिंह और माँ शकुंतला कालेज ऑफ हायर एजुकेशन से योगेश त्रिपाठी, सीता सिंह,राधा कुजूर, सीमा सिंह, विनीता सिंह उपस्थित रहे।

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