
अक्षय तृतीया के पर्व को आखा तीज के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन अबूझ मुहूर्त होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, अक्षय तृतीया के अवसर पर सभी कामों को करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। इस दिन सोना और चांदी खरीदना शुभ माना जाता है। माना जाता है कि इस दिन विशेष चीजों का दान करने से धन लाभ के योग बनते हैं। साथ ही सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। क्या आप जानते हैं कि आखिर क्यों अक्षय तृतीया का त्योहार मनाया जाता है? अगर नहीं पता, तो आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।
वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 29 अप्रैल को शाम 05 बजकर 31 मिनट से शुरू होगी और अगले दिन यानी 30 अप्रैल को दोपहर 02 बजकर 12 मिनट पर तिथि खत्म होगी। सनातन धर्म में सूर्योदय तिथि का विशेष महत्व है। ऐसे में इस बार 30 अप्रैल को अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाएगा। अक्षय तृतीया के दिन पूजा करने का शुभ मुहूर्त सुबह 05 बजकर 41 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 18 मिनट तक है। इस दौरान किसी भी समय साधक पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 31 मिनट से 03 बजकर 24 मिनट तक
सर्वार्थ सिद्धि योग – पूरे दिन
गोधूलि मुहूर्त – शाम 06 बजकर 55 मिनट से 07 बजकर 16 मिनट तक
अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर दान करने का विशेष महत्व है। मान्यता के अनुसार, इस दिन दान करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। साथ ही मां लक्ष्मी की कृपा बरसती है। पौराणिक कथा के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि यानी अक्षय तृतीया से सतयुग की शुरुआत हुई थी। मान्यता है कि अक्षय तृतीया से ही वेद व्यास जी ने महाभारत को लिखने की शुरुआत की थी।
इसके अलावा अक्षय तृतीया के दिन ही भगवान परशुराम जी का जन्म हुआ था। भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम माने जाते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भगवान परशुराम ऋषि जमदग्नि और राजकुमारी रेणुका के पुत्र थे। अक्षय तृतीया के दिन परशुराम जयंती का पर्व भी मनाया जाता है।



