Home छत्तीसगढ़ निश्छल सरगुजिहा साहित्य समिति ने किया सरस कवि-सम्मेलन का आयोजन 

निश्छल सरगुजिहा साहित्य समिति ने किया सरस कवि-सम्मेलन का आयोजन 

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रिपोर्टर मुन्ना पांडेय,सरगुजा : निश्छल सरगुजिहा साहित्य समिति के ओर से भारतेंदु भवन अम्बिकापुर में वार्षिक सम्मान समारोह, पुस्तक-विमोचन एवं कवि-सम्मेलन का आयोजन वरिष्ठ कवि और संस्थापक अध्यक्ष एस0पी0 जायसवाल “”निश्छल “”
की अध्यक्षता में किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महापौर मंजूषा भगत, विशिष्ट अतिथि जायसवाल समाज के संभागीय अध्यक्ष उमेश जायसवाल, राजभाषा आयोग छत्तीसगढ़ के जिला समन्वयक राजेश तिवारी, कवयित्री मीना वर्मा और कवि डॉ. उमेश पांडेय रहे।
मंच संचालन वरिष्ठ गीतकार देवेन्द्रनाथ दुबे ने किया। श्रोताओं ने देर शाम तक कार्यक्रम का भरपूर लुत्फ उठाया।अतिथियों ने धूप-दीप प्रज्वलित कर मां वीणावादिनी की पूजा-अर्चना किये पश्चात् कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। गीतकार पूनम दुबे ‘वीणा’ ने सुमधुर स्वरों में सरस्वती-वंदना की प्रस्तुति दी।
निश्छल सरगुजिहा साहित्य समिति की ओर से प्रतिवर्ष किसी एक सरगुजिहा कवि को शॉल-श्रीफल और नगद राशि से सम्मानित किया जाता है। इसी क्रम में वर्ष 2025 के लिए पुहपुटरा, लखनपुर निवासी वरिष्ठ कवि आनंदराम ‘अकेला’ को सम्मानित किया गया। चौबीस पुस्तकों के रचयिता कविवर एस पी जायसवाल को भी जायसवाल समाज के संभागीय अध्यक्ष उमेश जायसवाल ने शॉल-श्रीफल और नगद राशि से सम्मानित किया। साथ ही उनके दो काव्य-संग्रह- ‘नोनी कर दाई’ (सरगुजिहा) और काव्यकुंज (हिन्दी) का विमोचन भी अतिथियों ने किये । विदित हो कविवर एसपी जायसवाल के सतत् प्रयासों से दक्षिण भारत के लोग भी अब सरगुजिहा को जानने लगे हैं। और उनकी इसमें दिलचस्पी बढ़ी है।काव्यगोष्ठी में पहलगाम आतंकी हमले पर कवियों द्वारा गहरा दुख और रोष व्यक्त किया गया। सभी कवियों द्वारा एक स्वर से इस वीभत्स व कायराना घटना की तीखी भर्त्सना की गई और आतंकी हमले को अंजाम देनेवाले आतंकियों और उनके आकाओं के खि़लाफ़ कड़ी कारवाई की मांग सरकार से की गई। कवयित्री मंशा शुक्ला का ग़ुस्सा उनकी कविता में फूट पड़ा- क्षमा की हद हुई पूरी, अब प्रतिकार बा़की है। दुराचारी दरिंदों पर अब प्रतिघात बाक़ी है।। वरिष्ठ कवयित्री गीता दुबे ने भी ललकारा- कितनी सूनी कर दीं मांगें, कितने मेंहदी के हाथ धुले। हुईं गोदें सूनी, रोईं मांएं, बापू के कलेजे पत्थराए।
 अब तो जागो हिन्दू चेतो, क्या कलमा याद करोगे। गीतकार गीता द्विवेदी के गीतात्मक हुंकार में आतंकियों से लड़ने  हर भारतीय का संकल्प अनुगूंजित हो उठा- वीरता से हम लड़ेंगे, है क़सम मां भारती। देश के दुश्मन मिटेंगे, है क़सम मां भारती।। पुलवामा, पहलगाम चीख-चीख कहते, तुमको बचाएगा न कोई रब पापियों। पूंछ पर नाग के देते हो पांव बार-बार। मिटने हो जाओ तैयार अब पापियों।।कविवर श्यामबिहारी पांडेय ने अपने ओजस्वी गीत में युवाओं को जागने और देश के दुश्मन गद्दारों को सबक़ सिखाने का आह्वान किया- जागो मेरे देश के शेरों! तुम्हें जगाने आया हूं। भारत की गौरव-गाथा मैं तुम्हें सुनाने आया हूं! कवयित्री अंजू पांडेय का दर्द उनकी कविता में छलक पड़ा- काश! हर कश्मीरी भी वतन का पहरेदार होता, महकती वादियां, आनंद अपार होता। कवि रामलाल विश्वकर्मा ने दुश्मनों के संपूर्ण संहार का आह्वान किया– दुश्मनों पर ऐसा कुछ वार होना चाहिए। अब सबक़ केवल नहीं, संहार होना चाहिए।। कवि प्रकाश कश्यप ने सरगुजिहा में अपने प्रतिशोध की भावना जताई-
 रोसे नरियाबो एहि ठन, जम ला फरियाबो एहि ठन।
 जेमन मरल ला मार पुराथें, तिनके तरियाबो एहि ठन।।
कवि डॉ. अजयपाल सिंह ने देश के युवाओं से यहां तक कह दिया कि- उठो युवक! पूछो उनसे उन कश्मीरी ललनाओं से। लुटी हुई अस्मत से पूछो, पूछो उन माताओं से। उठो देश के वीर जवानों, मां-बहनें धिक्कार रही हैं। मां-बहनों की इज़्ज़त ख़ातिर क्या तुममें अंगार नहीं है।।
कवि-सम्मेलन में वरिष्ठ कवयित्री मीना वर्मा ने शांति और लोकतंत्र के लिए प्रयासरत् कश्मीर की वादियों के एक बार फिर रक्तरंजित होने की बात कही। संस्था के अध्यक्ष कविवर एसपी जायसवाल ने अपने काव्य में पहलगाम घटना के लिए पाकिस्तान को पूर्णतः जिम्मेदार बताते हुए उसे बेगुनाहों का का़तिल और दहशतगर्दों का पनाहगार बताते हुये कहा- -नाम मिटा दो अब नक्शे से, पाकिस्तान हत्यारा है। धर्म पूछकर निर्दोषों को पहलगाम में मारा है। हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई आपस में हैं भाई-भाई। इन बातों से किया किनारा है।  मौत आ गई अब गीदड़ की, सिंहों को उसने ललकारा है।।
 कवयित्री अंजू प्रजापति की सलाह सभी श्रोताओं को रास आई- चलो आज मिलकर आवाज़ उठाएं। धर्म नहीं, इंसानियत को गले लगाएं। कवयित्री स्वाति टोप्पो ने जयहिंद का नारा बुलंद किया- देश से बड़ा न कोई धर्म है न जात। भारत मां के चरणों में अर्पण हो मन-गात। देशप्रेम हो जीवन का अभिमान। हर धड़कन में गूंजे ‘जयहिन्द’ का गान! कवि डॉ0 उमेश पांडेय ने आतंकियों द्वारा देशवासियों को साम्प्रदायिकता के रंग में रंगने के कुत्सित प्रयासों की जोरदार निंदा की- मन तो मेरा भी करता है, बदल रहा परिवेश। बदल रहा है देश, साम्प्रदायिकता के खेल में घुट रहा यह देश।।
 दोहाकार व शायर मुकुंदलाल साहू ने अपने दोहे में पहलगाम-हमले को पाकिस्तान का एक सुनियोजित षड़यंत्र बताते हुए उससे युद्ध को ही एकमात्र विकल्प बताया– समझाने से पाक को अक्ल न आई अल्प। है वार्ता से लाभ क्या, केवल युद्ध विकल्प ।।
इन कवियों के अलावा कार्यक्रम में कवयित्री आशा पांडेय, अर्चना पाठक, माधुरी जायसवाल, पूनम दुबे ‘वीणा’, महिमा श्रीवास्तव, चंद्रभूषण मिश्र, अजय सागर, राजेन्द्र विश्वकर्मा, कृष्णकांत पाठक, अम्बरीष कश्यप, विनोद हर्ष, संतोष सरल, आनंदराम अकेला, देवेन्द्रनाथ दुबे, आदि कवियों ने भी अपनी प्रतिनिधि कविताओं का पाठ किया। समारोह को महापौर मंजूषा भगत ने भी सम्बोधित किया और कवियों हेतु प्रेरक कार्यक्रम आयोजन के लिए समिति की सराहना की  धन्यवाद-ज्ञापन कविवर एस0 पी0 जायसवाल ने किया। इस अवसर पर शायर-ए-शहर यादव विकास, लीला यादव, के0के0 त्रिपाठी, दुर्गाप्रसाद श्रीवास्तव, संकल्प जायसवाल, लगनदास, बीडी सिंह, मंजू तिवारी, आरपी तिवारी और प्रियंका गुप्ता सहित कई काव्यप्रेमी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम यक़ीनन सरस रहा।

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