
अयोध्या:- अयोध्या में निर्माणाधीन राम मंदिर के पहले फ्लोर पर राम दरबार समेत आठ मंदिरों की प्राण प्रतिष्ठा कराई जा रही है. मंदिर प्रबंधन ने पहले इन सभी मंदिरों की प्राण प्रतिष्ठा एक साथ कराने का फैसला किया था. इसके लिए विद्वानों और आचार्यों के साथ काफी मंथन के बाद गंगा दशहरा की तिथि निर्धारित की गई. तय हुआ कि इसी तिथि को अभिजीत मुहूर्त में प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी. लेकिन इसमें एक बड़ी अड़चन भूत भावन भगवान भोलेशंकर के शिवलिंग को लेकर आ गई. दरअसल गंगा दशहरा के दिन शिववास का कोई मुहूर्त ही नहीं था.
जानकारी के मुताबिक राम मंदिर के प्रथम तल पर विराजित राम दरबार और परकोटे में मौजूद अन्य देवों के विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा के लिए कई दिनों से मंथन चल रहा था. 100 से अधिक आचार्यों से राय ली गई, शुरू में सबकी राय अलग अलग थी, हालांकि इनमें ज्यादातर विद्वानों ने गंगा दशहरा की तिथि को सर्वोत्तम बताया. इसमें भी अभिजीत मुहूर्त को प्राण प्रतिष्ठा के लिए श्रेष्ठ कहा था. चूंकि इसी तिथि पर भगवान कृष्ण की आभा से अच्छादित द्वापर युग का प्रारंभ हुआ था. इस तिथि और मुर्हूत पर सहमति तो बन गई, लेकिन अब नई अड़चन शिववास को लेकर थी.
पहले भी तिथि और मुहूर्त में उलझ चुका है मामला
दरअसल इन आठ मंदिरों में एक शिवलिंग भी था और गंगा दशहरा के मुहूर्त को शिववास के लिए उचित नहीं माना गया. ऐसे में आचार्यों ने पांच दिन पहले 31 मई को शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा के लिए श्रेष्ठ बताया. राम मंदिर में तिथि और मुहूर्त को लेकर उलझन कोई पहली बार नहीं हुई है. इससे पहले राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा के वक्त भी इसी तरह की उलझन थी. उस समय भी सभी विद्वानों की राय के बाद 22 जनवरी यानी पौष शुक्ल द्वादशी की तिथि निर्धारित हुई. दरअसल इसी तिथि को समुंद्र मंथन के समय भगवान नारायण का कूर्मावतार हुआ था.



