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“बचेली में AECS NGO की गौ सेवा: समर्पण के साथ चुनौतियों का सामना”

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एस एच अज़हर अमन पथ दंतेवाड़ा : बचेली नगर में गौ सेवा: AECS NGO का प्रयास और चुनौतियाँबचेली नगर में गौ वंश की सेवा और इलाज का कार्य AECS NGO के नेतृत्व में गीतांजलि सरकार, फिरोज नवाब, प्रदीप गुप्ता, अरुणा टंडन, रोहित पटेल, और बंटी भाई जैसे समर्पित समाजसेवियों द्वारा 2013 से निरंतर किया जा रहा है। इस संस्था ने मूक प्राणियों की सेवा को आत्मसात करते हुए कई गायों और अन्य पशुओं के जीवन को बचाया है। विशेष रूप से, कोविड-19 लॉकडाउन जैसे कठिन समय में भी इन्होंने जोखिम उठाकर पशुओं के लिए चारा वितरण और इलाज का कार्य जारी रखा।प्रमुख गतिविधियाँ और योगदानगौ सेवा का प्रारंभ और विस्तार: AECS NGO की स्थापना गीतांजलि सरकार ने की, जिन्होंने 2013 में गौ सेवा का बीड़ा उठाया। इसके बाद, संस्था ने संगठित रूप से कार्य को विस्तार दिया, जिसमें घायल और बीमार गायों का इलाज शामिल है।सेवा कार्य: सड़कों पर घायल गायों का मरहम-पट्टी, छोटे-मोटे ऑपरेशन, और चारा वितरण जैसे कार्य AECS NGO की मुख्य गतिविधियाँ हैं। अरुणा टंडन, प्रदीप गुप्ता, और रोहित पटेल जैसे सदस्य इस कार्य में अग्रणी भूमिका निभाते हैं।कोविड-19 के दौरान सेवा: लॉकडाउन के दौरान भी संस्था ने पशुओं की देखभाल और इलाज जारी रखा, जो उनके समर्पण को दर्शाता है।चुनौतियाँस्थान की कमी: सबसे बड़ी समस्या यह है कि गौ वंश के इलाज और रखरखाव के लिए कोई निश्चित स्थान नहीं है। वेटनरी हॉस्पिटल के कर्मचारियों का कहना है कि उनके पास गायों को रखने की जगह नहीं है, जिसके कारण इलाज सड़कों पर करना पड़ता है।गौठान निर्माण का असफल प्रयास: बचेली में एक गौठान का निर्माण हुआ, लेकिन यह कार्य पशुओं या समाजसेवियों के लिए लाभकारी नहीं रहा।

अंततः यह गौठान नगर पालिका के नियंत्रण से निकलकर ग्राम पंचायत के अधीन चला गया, जिससे गौ सेवा के कार्य में कोई प्रगति नहीं हुई।संसाधनों की कमी: इलाज और देखभाल के लिए पर्याप्त संसाधनों और सुविधाओं का अभाव है, जिसके कारण सड़क किनारे ही उपचार करना पड़ता है।माँग और सुझावAECS NGO की प्रमुख गीतांजलि सरकार और फिरोज नवाब ने माँग की है कि गौ वंश के इलाज और रखरखाव के लिए एक सर्वसुविधायुक्त स्थान उपलब्ध कराया जाए। इससे न केवल सेवा कार्य में तेजी आएगी, बल्कि स्वस्थ होने वाले पशुओं की संख्या में भी वृद्धि होगी।नगर पालिका का घोषणा पत्रनगर पालिका ने अपने हालिया घोषणा पत्र में गौशाला निर्माण और गौ वंश के लिए विशेष कार्य करने का वादा किया है। यह AECS NGO के लिए एक आशा की किरण है, लेकिन इस वादे को अमल में लाने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।संभावित समाधानसरकारी सहयोग: हरियाणा और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में गौ सेवा आयोग और गौशाला पंजीकरण योजनाएँ चल रही हैं, जिनके तहत अनुदान और सुविधाएँ प्रदान की जाती हैं। बचेली नगर पालिका और छत्तीसगढ़ सरकार ऐसी योजनाओं को लागू कर सकती है।वेटनरी सुविधाओं का विस्तार: मध्य प्रदेश में पशु एम्बुलेंस सेवा (टोल-फ्री नंबर 1962) की तरह, बचेली में भी मोबाइल वेटनरी यूनिट शुरू की जा सकती है, जो त्वरित इलाज प्रदान करे।सामुदायिक भागीदारी: स्थानीय समुदाय को गौ सेवा में शामिल करने के लिए जागरूकता अभियान और सदस्यता योजनाएँ शुरू की जा सकती हैं, जैसा कि उत्तर प्रदेश की ‘गौ ग्रास सेवा योजना’ में किया गया है।गौशाला निर्माण: एक पंजीकृत गौशाला की स्थापना, जिसमें चिकित्सा, चारा, और रहने की उचित व्यवस्था हो, इस समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है।निष्कर्षAECS NGO का गौ सेवा के प्रति समर्पण प्रेरणादायक है, लेकिन स्थान और संसाधनों की कमी उनके कार्य को सीमित कर रही है। नगर पालिका के घोषणा पत्र में किए गए वादों को पूरा करने और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने से इस कार्य को नई दिशा मिल सकती है। स्थानीय प्रशासन, वेटनरी विभाग, और समुदाय के सहयोग से बचेली में गौ वंश की सेवा और संरक्षण को और प्रभावी बनाया जा सकता है।संपर्क और सहयोग: AECS NGO के कार्यकर्ताओं को सहयोग करने के लिए, स्थानीय प्रशासन या संबंधित विभागों से संपर्क कर गौशाला स्थापना और अनुदान के लिए आवेदन किया जा सकता है। साथ ही, समुदाय के लोग भी दान और स्वयंसेवा के माध्यम से इस लनेक कार्य में योगदान दे सकते हैं।यदि आप इस विषय पर और जानकारी चाहते हैं या कोई विशिष्ट सहायता चाहिए, तो कृपया बताएँ।

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