Home छत्तीसगढ़ आस्था के साथ मनाया गया निर्जला एकादशी व्रत

आस्था के साथ मनाया गया निर्जला एकादशी व्रत

0

रिपोर्टर मुन्ना पांडेय सरगुजा : हिन्दू धर्म में निर्जला एकादशी व्रत का विशेष महत्व रहा है। गंगा दशहरा के ठीक दूसरे दिन निर्जला एकादशी का पावन पर्व मनाईं जाती है।
साल के सभी 24 एकादशीयो में भीमसेनी एकादशी सबसे श्रेष्ठ एवं विशेष फलदायी मानी गई है। निर्जला का शाब्दिक अर्थ है जल के बिना। प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ मास के एकादशी तिथि को बिना जल ग्रहण किये यह कठोर तप उपासकों द्वारा किया जाता है। यह भगवान विष्णु को समर्पित है। सही मायनों में व्रतधारी बिना जल ग्रहण किये निराहार रहकर 24 घंटे का उपवास रखते हैं।

बहरहाल नगर लखनपुर तथा आसपास ग्रामीण अंचलों में भीमसेनी एकादशी
6 जून दिन शुक्रवार को मनाया गया । इसे भीमसेनी निर्जला एवं पांडव एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।यह आस्था का पर्व है।निर्जला एकादशी के रोज व्रत रख भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करने का विधान है।साथ ही इस दिन दान दक्षिणाकरने से कई गुना अधिक फल की प्राप्ति होती है।समस्त पापों से मुक्ति मिल जाता है। व्रत के करने से उपासक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है।उपवास रखने के बाद भगवान विष्णु माता लक्ष्मी की कथा सुननी चाहिए ।

धर्म शास्त्रों में वर्णित है कि- द्वापर युग में महर्षि वेदव्यास के कहने पर पांडु पुत्र भीम ने इस व्रत को किया था। क्योंकि भीमसेन कभी भोजन के बिना भूखे रह नहीं सकते थे। इसलिए वर्ष में सिर्फ एक बार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि को उपवास रखने का प्रण किया था। भीमसेन द्वारा किये जाने कारण इस व्रत का नाम भीमसेनी एकादशी पड़ा। श्रद्धालुओं ने श्रद्धा भक्ति के साथ निर्जला एकादशी व्रत रख भगवान सत्यनारायण के कथा सुने।

मंदिर देवालयों में जाकर माथा टेका तथा सुख समृद्धि के लिए ईश्वर से प्रार्थनाएं की। कीर्तन भजन अखंड रामायण पाठ का आयोजन हुआ। आगामी शनिवार अर्थात द्ववादशी तिथि को उपासक व्रत तोड़ पारण कर सकेंगे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here