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मांगलिकों का विवाह पेड़ों से क्यों होता है? क्या है इसके पीछे का रहस्य….

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12 जून2025:- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब मंगल ग्रह कुंडली में पहले, चौथे, सातवें, आठवें और बारहवें भाव में से किस एक भाव में मौजूद होता है तो वह व्यक्ति मांगलिक होता है. मांगलिक दोष होने से विवाह से लेकर वैवाहिक जीवन में बहुत सी दिक्कतें आती हैं. अक्सर लोग मांगलिक दोष को लेकर डरते हैं कि यह एक भयानक दोष है. हालांकि, मांगलिक दोष से घबराने की जरूरत नहीं होता है. मांगलिक दोष को लेकर समाज में कई मान्यताएं और प्रथाएं प्रचलित हैं.  धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अगर किसी मांगलिक व्यक्ति को शादी करके सुखी जीवन जीना है, तो उसे पहले पेड़ से शादी करनी पड़ेगी. मांगलिक का विवाह किसी पेड़ से कराने को कुंभ विवाह या वट वृक्ष विवाह भी कहते हैं. ऐसी मान्यता है कि मांगलिक का कुंभ विवाह कराने से मांगलिक दोष के नकारात्मक प्रभाव कम हो जा सकते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि मांगलिकों का विवाह पेड़ों से ही क्यों होता है? आइए जानें.

मांगलिक लोग पेड़ से शादी क्यों करते हैं:- मांगलिक व्यक्ति अपने गैर-मांगलिक जीवनसाथी की असमय मृत्यु का कारण भी बनता है. ऐसे में इस स्थिति को रोकने के लिए मांगलिक व्यक्ति की शादी किसी पेड़ (जैसे केला, वट या पीपल), घड़ा, शालिग्राम किसी निर्जीव वस्तु से करवाई जा सकती है. ज्योतिष में मांगलिक दोष के नकारात्मक प्रभावों को कम करने या दूर करने के लिए कुंभ विवाह अवश्य कराया जाता है.

ऐसी मान्यता है कि जिस व्यक्ति की कुंडली में मांगलिक दोष होता है, उसकी शादी से पहले आम, पीपल, महुआ या वट के पेड़ से उसका विवाह कराया जाता है, जिससे मांगलिक दोष समाप्त हो जाए. मांगलिक का पेड़ के संग विवाह कराते समय उस पेड़ की पूजा कराई जाती है और उस पेड़ में सिंदूर भी डाला जाता है. धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से कुछ हद तक मांगलिक दोष समाप्त हो जाता है.

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