रिपोर्टर मुन्ना पांडेय सरगुजा : मानसून की बेरुखी से जहां जमीन प्यासी है वहीं आषाढ़ मास में भी जेष्ठ का अहसास होने लगा है। चलने वाली तेज़ गर्म हवाओं तथा उमस भरी गर्मी से आम जनजीवन को न तो दिन में चैन है और ना रात में करार है। भड़कते गर्मी तथा होनेवाले बारिश ने धरातल का उमस बढ़ा दिया है। इस तरह के बेअदब मौसम ने आमजन जीवन का जीना दुश्वार कर दिया है। ध्यान देने योग्य है कि एसी कूलर पंखे आदि का असर भी इस उमस भरी गर्मी में बेअसर साबित हो रहा है। पक्के तथा कच्चे मकानों में ठंडक की तनिक भी गुंजाइश नहीं होने से तप्त मरूस्थल के साये में सिर्फ शीतलता रूपी मरीचिका मे लोग राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उमस है कि कम होने का नाम नहीं ले रहा। मानसून के नहीं आने से कृषि कार्य भी प्रभावित हो रहा है। चंद दिनों पहले हुये बारिश की सिलवटें ही बाकी है जो हर तरफ सिर्फ उमस भरी दिन और रात छोड़ गई है।इस भीषण गर्मी में खान पान तथा नीज स्वास्थ्य पर ध्यान रखने की बेहद जरूरत है। इंसान की हौसला है कि इस तपते गर्मी को झेल रहा है।,सुबह से लेकर शाम तक दहकते सूरज के साथ धरती भी जल रही है। इंतजार है मौसम परिवर्तन के साथ मानसून के आने का – तय है कि जब तक जमकर बारिश नहीं होगी उमस से राहत नहीं मिल सकती। सर्द गर्म जैसे वातावरण होने से नवजात शिशुओं में बिमारी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।



