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सोन्ढूर डैम मे मछली पकडने वालो की अब खैर नही वन विभाग हुई सक्रीय डैम के जंगलो मे कर रहे निगरानी

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संवाददाता अमनपथ राजूनाथ जोगी नगरी :  उदन्ती सीतानदी टायगर रिजर्व के अरसीकन्हार रेन्ज मे वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी सुबह पाच बजे से सोन्ढूर डैम मे अवैध मत्स्य खेट के खिलाफ अभियान चलाकर चलाकर दबिश दी जहा वन विभाग के पहुचते ही मछुआरे भाग गये वन विभाग के अधिकारियो ने मछली पकडने वाले जब्त कर जाच मे जुट गये उल्लेखनिय है की 15 जून से 15 अगस्त तक मछली पकडने मे बैन रहता है चूकी यह समय मछली का प्रजनन का समय रहता है बता दे टायगर रिजर्व का सोन्ढूर डैम अभ्यारण क्षेत्र मे आता है और अभ्यारण क्षेत्र के चलते यहा पाये जाने वाले मछली भी वन्य प्राणी की श्रेणी मे आता है जिसके चलते सोन्ढूर डैम मे मछली का टेन्डर यहा नही होता यह डैम मछली पकडने वाले मछुआरे के लिये खजाने का पिटारा साबित हो गया इस डैम मे उडीसा से लेकर क्षेत्र के मछली कोचिया के साथ आसपास के मछुआरे सक्रिय है जो खुलेआम डैम मे मछली के व्यवसाय मे लाखो कमा रहे वही टेन्डर नही होने के चलते भी राज्य शासन को हर वर्ष करोडो रूपय की राजस्व छति भी हो रही ऐसा नही की वन विभाग यहा कार्यवाही नही करती समय समय पर वन विभाग द्वारा अवैध शिकार रोकने यहा अभियान भी चलाया जाता है जिसके अब तक वन विभाग कई नाव जाल जब्त कर कई लोगो को जेल भी भेज चुकी है जहा वनाचल मे बसे डैम किनारे आदिवासी ही वन विभाग के लपेटे मे आ जाते है जो बाहर से आये मछुआरे नाव व जाल छोडकर जंगलो का सहारा ले कर भाग जाते है बारिश के पहली बाढ मे डैम के नदियो मे लग जाता है तंबू

वही मानसून का बारिश होते ही नदी नाले उफान मे आ जाते है और जैसे ही नदियो मे उफान आता है नदी के आस पास मछली पकडने वालो की लाईन लग जाती है डैम मे बाढ आते ही माछलिया तेजी से बाढ के पानी मे दौड लगाती है और प्रजनन भी दौड लगाने से ही होता है ऐसे मे प्रजनन के दौरान ही नदियो मे मछलिया पकडने वाले सक्रिय रहते है जो मछलियो को देखते ही नदियो मे जाल डालकर मछलिया पकडते है

हर वर्ष मछली पकडते कई लोग अपनी जान गंवा बैठते है

हर वर्ष बारिश मे मछली पकडने लोग सक्रिय हो जाते है जो हाथो मे जाल लेकर रात भर नदियो मे डेरा जमाये रहते है जहा कई लोग लोग रात के अंधेरे मे मछली पकडते नदी मे बहने या डूबने से मौत हो जाती है तो कई लोग जहरीले सर्प या कीडे मकौडे का शिकार हो जाते है

वन्य प्राणीयो को विचरण मे होती है तकलीफ

वही टायगर रिजर्व क्षेत्र मे बाहर से मछली पकडने आये मछुआरा जंगल अंदर डैम व नदी के किनारे तंबु लगाकर रहते है जो जंगलो के अंदर ही रहकर मछली पकडने का कार्य करते है ऐसे मे रात के समय जंगल अंदर मानव दबाव के चलते वन्य प्राणी अपने आप को असुरक्षित महसूस करते है और मछली पकडने के चलते ये जंगलो व नदियो के किनारे मे ही निवास करते है जहा बकायदा मछली कोचिया भी इनके टेट तक पहुच कर मछली ले कर जाते है

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