
मानसून अपने साथ राहत की फुहारें तो लाता है, लेकिन साथ ही स्किन एलर्जी और इन्फेक्शन का खतरा भी कई गुना बढ़ा देता है. इस मौसम में वातावरण में नमी बढ़ जाती है और उसके बाद बढ़ती है उमस. उमस में शरीर से पसीना बहुत निकलता है जिसमें बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनपते हैं. यही कारण है कि बारिश के मौसम में खुजली, रैशेज, दाद, फोड़े-फुंसी जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं.
दूसरी गलती है टाइट और सिंथेटिक कपड़े पहनना. मानसून में भले ही बाहर ठंडक हो लेकिन हवा में ह्यूमिडिटी ज्यादा होने के कारण शरीर बार-बार पसीना छोड़ता है. पसीना और गर्मी में अगर आप टाइट और सिंथेटिक कपड़े पहनते हैं तो यह पसीना स्किन पर रुक जाता है और एलर्जी की शुरुआत हो जाती है.
तीसरी गलती त्वचा की साफ सफाई न करना. मानसून में धूल-मिट्टी और पसीना स्किन की ऊपरी सतह पर जमा हो जाता है. अगर आप दिन में कम से कम दो बार मुंह और शरीर को अच्छे से नहीं धोते, तो रोम छिद्र बंद हो जाते हैं और स्किन पर रैशेज हो सकते हैं.
चौथी गलती है गीले जूतों या चप्पलों का लगातार पहने रहना. इससे पैरों की बदबू बननी शुरू हो जाती है साथ ही फंगल इन्फेक्शन भी बढ़ने लगता है. इसके अलावा बहुत अधिक क्रीम या मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल भी स्किन को चिपचिपा बना सकता है, जिससे एलर्जी और फंगल इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है.
पांचवी गलती है खान-पान में लापरवाही. अलावा बारिश में खुले में मिलने वाला स्ट्रीट फूड भी स्किन एलर्जी का एक छुपा कारण हो सकता है, क्योंकि गंदा खाना शरीर के अंदर से एलर्जिक रिएक्शन को ट्रिगर कर सकता है. मानसून में रोड साइड मिलने वाला तला-भुना खाना न खाएं.
मानसून में स्किन को हेल्दी रखने के लिए जरूरी टिप्स
गीले कपड़ों/मोजों को तुरंत बदलें
कॉटन जैसे सांस लेने वाले कपड़े पहनें
स्किन को दिन में दो बार क्लीन करें
बहुत भारी स्किन प्रोडक्ट्स से बचें
नहाने के पानी में एंटीसेप्टिक लिक्विड या नीम के पत्ते डालें
नहाने के बाद एंटी फंगल पाउडर इस्तेमाल कर सकते हैं



