Home आस्था गुंडिचा मंदिर में सात दिन क्यों ठहरते हैं भगवान जगन्नाथ जी? जानिए...

गुंडिचा मंदिर में सात दिन क्यों ठहरते हैं भगवान जगन्नाथ जी? जानिए इसके पीछे का रहस्य?

0

पुरी की पवित्र भूमि पर आज से एक बार फिर आस्था और भक्ति का सागर उमड़ पड़ा है. जगन्नाथ रथ यात्रा 2025 की शुरुआत हो चुकी है और पूरा पुरी शहर भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की भव्य रथ यात्रा का गवाह बन गया है. रथों को खींचने के लिए हजारों भक्त उमड़ पड़े हैं, हर गली, हर चौराहे पर भजन-कीर्तन की गूंज सुनाई दे रही है. ऐसा लगता है मानो भगवान खुद अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए मंदिर से बाहर निकल आए हों. इस उत्सव का सबसे सुंदर पहलू यही है कि भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों के करीब आते हैं, खासकर उन लोगों के लिए जो किसी कारण उनके मंदिर के गर्भगृह तक नहीं जा सकते. आज से पुरी में सात दिनों तक भक्ति, प्रेम और उल्लास का माहौल छाया रहेगा, क्योंकि रथ यात्रा शुरू हो चुकी है.

गुंडिचा मंदिर में भगवान जगन्नाथ का प्रवास
भगवान जगन्नाथ अपने भाई और बहन के साथ रथ पर सवार होकर आज गुंडिचा मंदिर  के लिए रवाना हो चुके हैं. इसे भगवान की मौसी का घर भी कहा जाता है. अब अगले सात दिनों तक भगवान जगन्नाथ यहीं रहेंगे. इस दौरान गुंडिचा मंदिर में विशेष पूजा-पाठ, भजन और कई पवित्र अनुष्ठान होंगे. भक्त दूर-दूर से यहां पहुंचकर भगवान के दर्शन करेंगे, भोग अर्पित करेंगे और उनका आशीर्वाद लेंगे. इन सात दिनों में मंदिर का माहौल पूरी तरह भक्तिमय रहता है. भगवान को मीठा चावल, दाल, पीठा और कई पारंपरिक उड़िया व्यंजन चढ़ाए जाते हैं. उनके लिए फूलों और दीपों से सुंदर सजावट की जाती है, जिससे मंदिर की शोभा कई गुना बढ़ जाती है.

भगवान जगन्नाथ गुंडिचा मंदिर में सात दिन क्यों रुकते हैं?
गुंडिचा मंदिर में भगवान जगन्नाथ का सात दिन तक रुकना सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि इसका गहरा आध्यात्मिक अर्थ भी है. माना जाता है कि भगवान अपने भव्य मंदिर से बाहर निकलकर अपने भक्तों के करीब आते हैं ताकि वे हर किसी को अपने दर्शन दे सकें, चाहे वह अमीर हो या गरीब. सात दिन तक गुंडिचा मंदिर में रहकर भगवान जगन्नाथ यह संदेश देते हैं कि ईश्वर अपने भक्तों के बीच रहना पसंद करते हैं. इन दिनों को बेहद शुभ माना जाता है क्योंकि यह प्रेम, करुणा और समर्पण का समय होता है, जिसमें भगवान सभी पर समान रूप से कृपा बरसाते हैं. यही वजह है कि भगवान जगन्नाथ हर साल अपनी मौसी के घर गुंडिचा मंदिर में सात दिन रुकते हैं और अपने भक्तों के साथ यह विशेष समय बिताते हैं. लोग मानते हैं कि इन दिनों भगवान की विशेष कृपा मिलती है, जिससे जीवन में सुख और शांति आती है.

भक्ति, प्रेम और सेवा का उत्सव
पुरी की रथ यात्रा और गुंडिचा मंदिर में भगवान का प्रवास वह समय होता है जब हर कोई भगवान के और करीब महसूस करता है. भक्त जगह-जगह सेवा कार्य करते हैं, मंदिरों को सजाते हैं, विशेष व्यंजन बनाते हैं और पूरे मन से भजन-कीर्तन करते हैं. यह पर्व हमें यह भी सिखाता है कि भगवान किसी ऊंच-नीच को नहीं देखते. उनका प्रेम सबके लिए समान है. यही वजह है कि जगन्नाथ रथ यात्रा आज भी करोड़ों लोगों की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बनी हुई है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here