Home छत्तीसगढ़ कलेक्टर जनदरबार में दरखास्त पेश करने के बाद भी नहीं मिला इंसाफ...

कलेक्टर जनदरबार में दरखास्त पेश करने के बाद भी नहीं मिला इंसाफ तो – अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन करने मांगी इजाज़त

0

रिपोर्टर मुन्ना पांडेय सरगुजा : सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड के तहत आने वाले वनांचल ग्राम परसा, केते, सालही घाटबर्रा हरिहरपुर वन परिक्षेत्र के भू-भाग में कोयला खदान संचालित हो रहा है। केते ईस्ट परसा खदान,(पीईकेबी) के प्रथम फेस तथा दूसरा फेस में रोजगार सहित कई मुद्दों को लेकर सरगुजा कलेक्टर के जनदरबार में सामाजिक कार्यकर्ता राजेश प्रसाद गुप्ता आ0 रामप्रसाद गुप्ता निवासी ग्राम जमगला ने जनहित में फ़रियाद किया था। अपने दरखास्त में उल्लेख किया था कि सृजित पद में कितने प्रतिशत जिले के बेरोजगार लोगों को रोजगार दिया गया है ।स्थानीय बेरोजगारों को कम तथा बाहरी लोगों को ज्यादा संख्या में इन कंपनियों में रोजगार देकर रखा गया है।, ऐसा क्यों है ? वही कितने फिसदी अप्रशिक्षित बेरोजगारों को प्रशिक्षित कर रोजगार प्रदान किया गया है | खदान के सहयोगी कंपनी द्वारा वन भूमि में अस्थाई कैंप लगाया गया

शिकायतकर्ता राजेश प्रसाद गुप्ता ने अपने शिकायत में कहा में लिखा है कि खदान में कार्य करने वाले सहयोगी दो कंपनी जो सालही तथा परसा के मध्य जंगल में अवैध रूप से स्थाई कैंप लगाकर ठहरने एवं अन्य व्यवस्था उपलब्ध कराया जा रहा है यह किसके अनुमति से की जा रही है। जबकि वह भूमि वन परिक्षेत्र का है यदि किसी व्यक्ति को वन भूमि के तहत वन अधिकार पत्र प्राप्त भी हुआ है तो वन अधिकार पत्र के नियमों का पालन क्यों नहीं हो रहा,

मूलभूत सुविधाओं के सुधार में किया जा रहा अनदेखी

सामाजिक कार्यकर्ता गुप्ता ने उल्लेख किया है कि खदान 2012 से संचालित है खदान से प्राप्त मुनाफे का 2% राशि को स्थानीय सामाजिक उत्थान एवं ग्राम विकास कार्य में लगाए जाते हैं तो- खदान प्रभावित क्षेत्र के घाटबर्रा के आश्रित ग्राम शेदु, सुसकम, परोगिया आदि ग्राम अपने मूल ग्राम पंचायतों तक आवागमन के लिए फकत पगडंडी रास्ते हैं पक्की सड़क क्यों नही बनाये गये है ? उदयपुर क्षेत्र के कई ग्राम आज तक पहुंच विहीन है। इन पर खर्च क्यों नहीं किया गया ।प्रभावित क्षेत्र के बच्चों के साथ अध्ययन अध्यापन कार्य में भेदभाव क्यों शिकायत में यह भी कहा गया है कि खदान प्रभावित क्षेत्र के लोगों के लिए यदि केंद्रीय विद्यालय स्कूल का संचालन अदानी फाउंडेशन के द्वारा किया जा रहा है तो प्रभावित क्षेत्र में कई ऐसे शासकीय स्कूल हैं जहां ग्रामीण बच्चे अध्यनरत हैं उन बच्चों के लिए भी केंद्रीय सीबीएसई बोर्ड की पद्धति से पढ़ाई क्यों नहीं करवाया जा रहा भेदभाव क्यों है।

स्थानीय स्तर के धार्मिक एवं दार्शनिक स्थल पर सुधार हो

उदयपुर के दार्शनिक स्थल महेशपुर एवं रामगढ़ के कई स्थानों पर बुनियादी मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है इसके सुधार कार्य हेतु सीएसआर का उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा है ।जबकि सीएसआर मद का उपयोग स्थानीय स्तर विकास के लिए किया जाना चाहिए। वर्तमान में कितना कार्य उक्त मद से क्षेत्र में हुए हैं पारदर्शी नहीं है।इन सभी मुद्दों को लेकर जिला कलेक्टर के जनदर्शन के माध्यम से शिकायत प्रस्तुत कर तत्काल कार्यवाही किए जाने की मांग की गई थी लेकिन 8 माह बीत जाने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं हुई

दरखास्त पेश कर्ता ने विज्ञप्ति में बताया है कि इस मसले पर सरगुजा कलेक्टर के जनदरबार में दरखास्त पेश कर न्याय की गुहार लगाई गई थी अफसोस कि आज पर्यंत तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। जानकारी के मुताबिक उक्त प्रकरण उदयपुर एसडीएम के पास है मगर एसडीएम द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। आज कल करेंगे करके टाल मटोल किया जा रहा उस है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कलेक्टर के जनदर्शन में किये गये शिकायत के परिप्रेक्ष्य में प्रशासनिक अधिकारी किसी भी तरह की कार्यवाही करने से मुकर रहे हैं।

लिहाजा शिकायतकर्ता राजेश गुप्ता ने बताया कि प्रशासनिक अधिकारियों पर भरोसा है कि इंसाफ मिलेगा। लेकिन यदि अधिकारियों द्वारा लापरवाही बरती गई और इसी तरह से समय बढ़ता रहा तो तय है कि आने वाले समय में आमरण अनशन पर
बैठने मजबूर होना पड़ेगा। जिसे लेकर सामाजिक कार्यकर्ता राजेश गुप्ता ने अनिश्चितकालीन हड़ताल करने की अनुमति प्रदान करने अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व) उदयपुर के समक्ष 3 जुलाई को आवेदन पत्र प्रेषित किया है। शिकायत कर्ता ने साफ़ लफ़्ज़ों में कहा है कि यह जनहित का मुद्दा है और लड़ाई अंतिम सांस तक लड़ी जायेगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here