Home छत्तीसगढ़ अकीदत के साथ मनाया गया मातमी पर्व मुहर्रम -निकाली गई जुलूस

अकीदत के साथ मनाया गया मातमी पर्व मुहर्रम -निकाली गई जुलूस

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रिपोर्टर मुन्ना पांडेय सरगुजा : सदियों पुरानी चली आ रही परमपरा को कायम रखते हुए स्थानीय मुस्लिम कौम के लोगों ने 6 जुलाई दिन रविवार को हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के शहादत की याद में मातमी पर्व मुहर्रम शिद्दत के साथ मनाया। इस्लाम धर्म के मुताबिक मोहर्रम इस्लामी साल का पहला महीना होता है।

इसे हिजरी भी कहते हैं। इस्लाम धर्म के जानकार धार्मिक प्रचलित मान्यता के बारे में बताते हैं – मुहर्रम इस्लाम के इतिहास का सबसे भावुक और बलिदान का वक्त है। क्योंकि इस दिन इमाम हुसैन की शहादत को याद किया जाता है जिन्होंने न्याय और सच्चाई के लिए अपनी जान तक कुर्बान कर दिये।

दास्तां- ऐ -मुहर्रम है- -मुल्के इराक में यजीद नाम के बादशाह जिसने मोहम्मद मुस्तफा के नवासे हजरत इमाम हुसैन को कर्बला नाम के जगह पर परिवार तथा उनके हिमायतीयो के साथ शहीद कर दिया था। जिस महिने में हुसैन और उनके परिवार को बर्बरता के साथ शहीद किया गया था वह मुहर्रम महिने की दसवीं तारीख थी । जो लोग कर्बला में शहीद हुए थे उन्हें याद किया जाता है मोहर्रम के दसवें दिन मुस्लिम समुदाय के द्वारा लकड़ी बांस और रंग-बिरंगे कपड़ों कागजों से सुसज्जित ताजिया बतौर हजरत इमाम हुसैन की मकबरे के प्रतिक के रूप में बनाकर सड़कों में निकाले जाते हैं।

जुलूस में इमाम हुसैन की सैन्य बल के शक्ल में शस्त्रों के साथ युद्ध कला बाजी दिखाते हुए लोग चलते हैं। ‌जुलूस में शामिल लोग इमाम हुसैन के प्रति अपनी संवेदना दर्शाने के लिए बाजों पर शोक धून बजाते इमाम हुसैन के शहादत को याद करते हैं। बताया जाता है यही से मुहर्रम मनाये जाने की चलन आरंभ हुई। मुहर्रम से जुड़ी और भी कई धार्मिक मान्यताऐ है।

फिलहाल नगर लखनपुर में दसवीं तिथि पहलाम के रोज ताजियादारों ने ईमाम बाड़ा से डीजे साउण्ड सिस्टम पर मर्सिया बजाते हुए दुल्ला बाबा की सवारी के साथ ताजिया जुलूस निकाले। नगर के गलियारों में नाले अरधात तथा नाले हैदर के नाम से आने वाले मो0 फरीद खान और मो0 जाकिर हुसैन दुल्ला बाबा के अद्भुत सवारी को देखने तथा मन्नत मांनने झाड़ फूंक कराने वालों की भीड़ लगी रही‌‌। दुल्ला बाबा के सवारी ने अपनी दुआओं से सबकी सलामती एवं खुशहाली के लिए अल्लाह तआला से फरियाद किये।

ताजियादारों का काफिला इमाम बाड़ा से निकल कर कदमी चौक पठानपुरा, बिलासपुर मुख्य मार्ग, बस स्टैंड, पैलेस रोड नगर के विभिन्न गलियों से गुजरते राज महल के सामने पहुंची जहां पुराने जमाने से चली आ रही रिवायत के मुताबिक राजपरिवार के सदस्यों ने बाकायदे इत्र ,गुलाबजल फूल मालाओं से दुल्ला बाबा सवारी तथा ताजिया का स्वागत किये।

रस्म अदायगी के बाद बरसते बरसात में भीगते हुए ताजिया जुलूस बाजारपारा होते हुये देर शाम नगर लखनपुर के शिवपुर वार्ड में मौजूद शहीद-ए-करबला मुकाम पर पहुंचा जहां कौम के जानकारों ने फातिहा पढ़ी । बाद इसके ताजिया को विसर्जित तथा दुल्ला बाबा सवारी को ठंडा किया गया। इस तरह से मातमी पर्व मुहर्रम का सफर मुकम्मल हुआ।

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