
रिपोर्टर मुन्ना पांडेय सरगुजा : सरकार आम जनता के सुविधा को देखते हुए छ़ोटी बड़ी चलित मुद्रा के साथ रूपये अठन्नी चवन्नी सिक्के छुट्टे पैसे बनाकर आमजनता के लिए जारी किये थे। लेकिन चलन में नहीं होने से आज लोगों को चिल्लर के लिए दिक्कत हो रही है। बाजार दुकान में सामान खरीदारी करने के बाद चिल्लर वापसी के लिए ग्राहक को घंटों इंतजार करना पड़ता है या फिर चिल्लर के बदले दूसरी सामान लेनी पड़ती है। एक दो के सिक्के जहां बाजारों से गायब हो गए उसी तरह पांच दस बीस के करेंसी भी कम होती जा रही है। बैंक अथवा डाक घरों में एक और दो रुपये के सिक्के नहीं लिये जाते। लेने देन बिल्कुल बंद है। यही वज़ह एक दो के सिक्के की कोई कद्र नहीं रह गई है। आदान-प्रदान नहीं होने से आम लोगों को क्षति उठानी पड़ रही है। बाजार में खुदरा के लिए परेशानी बढ़ती जा रही है।
नगर लखनपुर के कुछ व्यवसायियों ने खुदरा चलन को लेकर अपनी सहमति जताई है ताकि परेशानी ना हो। छोटे एक दो के सिक्के जमा कर रखे हैं। इंतजार में हैं कि इन सिक्कों का चलन आरंभ हो और चिल्लर की चिक-चिक खत्म हो। साथ ही शासन प्रशासन का ध्यानाकर्षण कराया है कि कानूनी रूप से व्यवस्था सुधार कराते हुए एक दो रूपये सिक्के को भी चलन में सुचारू किया जाये।



