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रक्षाबंधन पर भद्रा और राहुकाल में क्यों नहीं बांधते हैं राखी? जानें इसके पीछे की धार्मिक वजहें…

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रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक है, जिसे हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा को बड़े उल्लास के साथ मनाया जाता है. बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र और खुशहाली की कामना करती हैं, वहीं भाई अपनी बहनों की रक्षा का संकल्प लेते हैं. हालांकि, राखी बांधते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना बेहद ज़रूरी होता है, खासकर भद्रा और राहुकाल के समय राखी बांधने से बचने की सलाह दी जाती है. आइए जानते हैं इसके पीछे की धार्मिक वजहें क्या हैं.

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भद्रा शनिदेव की बहन हैं और स्वभाव से काफी उग्र हैं. उन्हें ब्रह्मा जी ने श्राप दिया था कि जो भी व्यक्ति उनके समय में कोई शुभ कार्य करेगा, उसे अशुभ फल प्राप्त होगा. यही कारण है कि भद्रा के समय में राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता है, क्योंकि इससे भाई-बहन के रिश्ते पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है. मान्यता है कि भद्रा में राखी बांधने से भाई के जीवन पर संकट आ सकता है या उसके सौभाग्य में कमी आ सकती है.

राहुकाल: शुभ कार्यों में वर्जित समय:- राहुकाल भी ज्योतिष शास्त्र में एक अशुभ मुहूर्त माना जाता है. यह हर दिन लगभग डेढ़ घंटे का एक ऐसा समय होता है जब राहु का प्रभाव अत्यधिक होता है. राहु को एक छाया ग्रह माना जाता है, जो शुभ कार्यों में बाधा उत्पन्न करता है और नकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राहुकाल में किए गए कार्य अक्सर सफल नहीं होते या उनके परिणाम अपेक्षित नहीं होते. इसलिए, राखी बांधने जैसे पवित्र और शुभ कार्य को राहुकाल में करने से बचना चाहिए. ऐसा माना जाता है कि राहुकाल में बांधी गई राखी भाई-बहन के रिश्ते में कड़वाहट ला सकती है या रिश्तों में दूरियां पैदा कर सकती है. यह भी कहा जाता है कि राहुकाल में शुरू किया गया कोई भी शुभ कार्य अशुभ फल देता है.

धार्मिक महत्व और संदेश:- भद्रा और राहुकाल में राखी न बांधने के पीछे की ये धार्मिक मान्यताएं हमें हमारे प्राचीन ज्योतिष और परंपराओं के महत्व को समझाती हैं. ये हमें बताती हैं कि किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले समय और मुहूर्त का ध्यान रखना कितना आवश्यक है. क्योंकि रक्षाबंधन सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और एक-दूसरे के प्रति समर्पण का प्रतीक है. इसलिए, हमें शुभ मुहूर्त में ही राखी बांधनी चाहिए.

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