
नई दिल्ली : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जुर्माने की धमकियों के बावजूद भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा। भारत सरकार के सूत्रों ने बताया कि ये दीर्घकालिक तेल अनुबंध हैं। रातोंरात खरीदारी बंद करना इतना आसान नहीं है। ट्रंप ने पिछले महीने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में संकेत दिया था कि रूसी हथियार और तेल खरीदने के लिए भारत को अतिरिक्त पेनल्टी का सामना करना पड़ेगा। लेकिन, अमेरिका के साथ जारी टैरिफ वार के बीच रूस से तेल खरीद जारी रखने को भारत सरकार का करारा जवाब माना जा रहा है।
भारत रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार है। भारत ने आधिकारिक रूप से इस मुद्दे पर कुछ नहीं कहा है, लेकिन सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया कि रूस से तेल आयात पर कोई रोक नहीं है। भारत की ऊर्जा खरीद राष्ट्रीय हितों और बाजार की ताकतों पर आधारित है। हमारे पास भारतीय तेल कंपनियों द्वारा रूसी आयात रोकने की कोई रिपोर्ट नहीं है।
कुछ रिपोर्टों में कहा गया था कि भारतीय रिफाइनरियों (इंडियन आयल कार्पोरेशन, ‘हदुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन और मैंगलोर रिफाइनरी पेट्रोकेमिकल लिमिटेड) ने पिछले सप्ताह रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया। लेकिन, आइएएनएस ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि चारों रिफाइनरियां नियमित रूप से मांग के आधार पर रूसी तेल खरीदती हैं और वैकल्पिक रूप से पश्चिम एशिया और अफ्रीकी बाजारों का रुख कर रही हैं।
रायटर ने इसी सप्ताह बताया था कि जुलाई में छूट कम होने के बाद भारत की सरकारी तेल रिफाइनरियों ने रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया है। PTI के अनुसार, भारत की प्रतिक्रिया से पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने शिगूफा छोड़ा था कि उन्होंने सुना है भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा। उन्होंने इसे एक अच्छा कदम बताया, लेकिन साथ ही कहा कि उन्हें इस बारे में पूरी जानकारी नहीं है।



