दिल्ली:- सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर के आवारा कुत्तों की बढ़ती तादाद को लेकर बड़ा आदेश दिया. कोर्ट ने कहा कि अगले 8 हफ्तों के अंदर सभी आवारा कुत्तों को पकड़कर डॉग शेल्टर में रखा जाए. उच्चतम न्यायालय के इस फैसले की चारो तरफ खूब चर्चा हो रही है. लेकिन, क्या आपको पता है कि पेट से जुड़े पेट ब्रीडिंग का कारोबार दुनिया भर में करीब 1 लाख करोड़ रुपये का है.
डॉग ब्रीडिंग मार्केट के मुख्य पहलू:- डॉग ब्रीडिंग का मार्केट बहुत बड़ा है और आने वाले सालों में इसका और विस्तार होने की उम्मीद है. लेकिन कुछ चिंताएं भी हैं, जैसे अनैतिक ब्रीडिंग प्रैक्टिस, जहां खास दिखने वाली नस्लों के लिए ब्रीडिंग की जाती है, जिससे कुत्तों को हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं. इस इंडस्ट्री में अवैध ब्रीडिंग और पेट शॉप्स भी शामिल हैं, जिनका कनेक्शन ब्लैक मार्केट से हो सकता है. डॉग ब्रीडिंग में सख्त कानून और नैतिक गाइडलाइन्स की जरूरत है. टेक्नोलॉजी भी अब इसमें बड़ी रोल प्ले कर रही है, जैसे ब्रीडर्स और बायर्स को जोड़ने वाले प्लेटफॉर्म्स और ब्रीडिंग प्रोग्राम्स को मैनेज करने के कई सारे टूल चलाए जा रहे हैं. कुछ खास नस्लों की डिमांड, जो कभी-कभी सोशल स्टेटस या मीडिया ट्रेंड्स से बढ़ती है, मार्केट को बूस्ट देती है, लेकिन अगर जिम्मेदारी से मैनेज न किया जाए तो अनैतिक ब्रीडिंग को बढ़ावा दे सकती है.
आने वाले समय में मार्केट कैसा रहेगा:- आने वाले समय में ब्रीडिंग मैनेजमेंट में ट्रांसपेरेंसी और कुत्तों की हेल्थ पर ज्यादा फोकस होगा. नैतिक ब्रीडिंग और नियमों का पालन करने पर ज्यादा जोर दिया जाएगा. ब्रीडर्स और बायर्स को जोड़ने के लिए टेक्नोलॉजी का यूज और बढ़ेगा साथ ही ब्रीडिंग प्रोग्राम्स को मैनेज करने के टूल्स भी पॉपुलर होंगे.



