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Drug Peddler: पाकिस्तान से छत्तीसगढ़ पहुंच रही ड्रग की खेप, हत्थे चढ़े दो पैडलर, अब तक 22 हो चुके हैं गिरफ्तार

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रायपुर :  कमल विहार में फूटे ड्रग्स सप्लाई के सिंडीकेट से जुड़े दो और पैडलर मोमिनपारा और गोगांव-गुढ़ियारी से पकड़े गए हैं. पंद्रह दिनों में पाक से जुड़े पंजाब निवासी इंटरनेशनल स्मगलर लवजीत सिंह और सिंडीकेट चीफ सुवित श्रीवास्तव राजनांदगांव, करीबी ड्राइवर अश्वन चंद्रवंशी समेत 22 लोग गिरफ्तार किए गए हैं. आरोपियों ने रायपुर में अलग-अलग इलाके में रहने वाले युवाओं को नशे की लत लगाई और उन्हें ड्रग्स सप्लाई के लिए पैडलर बना लिया. ड्रग्स के लिए सिंडीकेट के संपर्क में आए 300 से ज्यादा नशेड़ी जांच के दायरे में हैं. अब तक की जांच में तीन महीने में सिंडीकेट द्वारा 1 करोड़ की ड्रग्स की बिक्री का पता चला है. जबकि आरोपियों के कब्जे से 450 ग्राम हेरोइन चिट्टा बरामद की गई थी, जिसकी कीमत भी 1 करोड़ बताई गई है.

दूसरे जिलों में सप्लाई की आशंका

खुलासा हुआ है कि सप्लाई सिंडीकेट ने पूरी राजधानी में अपना जाल फैला लिया था. पुलिस पता लगा रही है कि सिंडीकेट ने छग के अन्य जिलों और दूसरे प्रदेश में भी तो ड्रग्स सप्लाई नहीं की है. वैसे गिरफ्त में आए कई आरोपी गोंदिया महाराष्ट्र, उप्र और ओडिशा के भी मूल निवासी हैं लेकिन काम-धंधे या फिर पढ़ाई के लिए रायपुर आना बताते हैं. ऐसे में सप्लाई चेन अन्य जिलों और राज्यों से भी जुड़े होने की आशंका है.

हर वार्ड में सिंडीकेट से जुड़े नशेड़ी

गोगांव गुढ़ियारी निवासी प्रदीप गेंडरे पिता देवलाल गेंडरे 31 वर्ष एवं मोमिनपारा आजाद चौक निवासी फरहान रजा पिता शाहिद रजा 33 वर्ष के कब्जे से दो मोबाइल फोन, एक एटीएम कार्ड और पासबुक जब्त किए गए हैं. पुलिस ने दावा किया कि दोनों आरोपियों के खाते में ड्रग्स की बिक्री रकम ट्रांसफर की गई है. ये आरोपी खुद तो हेरोइन चिट्टा का नशा करते हैं. उन्होंने कई सप्लाई चेन बना रखे थे और नशेड़ी उनसे वॉट्सएप ग्रुप के जरिये जुड़े थे और यहीं से वे ऑर्डर लेते थे.

एरिया के हिसाब से बना था सिंडीकेट

पूछताछ में अवंति विहार, शंकरनगर, तेलीबांधा श्यामनगर, महावीरनगर, राजेन्द्रनगर, टाटीबंध उदया सोसायटी, हीरापुर, कबीरनगर, पुरानीबस्ती, सरोना, विधानसभा, खमतराई, बीरगांव निवासी नशेड़ी पैडलर गिरफ्त में लिए गए हैं. सिंडीकेट वाट्सएप ग्रुप बनाया हुआ था, जिसमें नशेड़ी अपना आर्डर देते थे, फिर उन्हें बैंक एकाउंट नंबर देकर उसमें रकम जमा करने कहा जाता था. इसके बाद किसी तय जगह पर डिस्पोजेबल में ड्रग्स की पुड़िया भरकर पैकिंग करके छोड़ा जाता और वीडियो कॉल के जरिये जगह बता दी जाती थी.

 

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