रिपोर्टर मुन्ना पांडेय सरगुजा : माता पिता के बाद गुरू का स्थान बहुत ऊंचा होता है। अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाले गुरु होते है। गुरु जिवनोपयोगी शिक्षा एवं ज्ञान प्रदान करते हैं। गुरु शिष्य के पवित्र संबंध को लेकर ब्लाक क्षेत्र के सभी शासकीय तथा नीजी शैक्षणिक संस्थाओं में अध्ययनरत स्कूली बच्चों ने अपने गुरुजनों के सम्मान में एक रोज बाद 6 सितंबर दिन शनिवार को शिक्षक दिवस मनाया। दरअसल 5 सितम्बर को प्रत्येक वर्ष शिक्षक दिवस मनाये जाने की परिपाटी रही है। लेकिन इस्लामी पर्व ईद मिलादुन्नबी होने कारण एक रोज बाद शिक्षक दिवस मनाई गई। उल्लेख मिलता है यह चलन 5 सितंबर 1962 से शुरू हुई है। दरअसल देश के भूतपूर्व राष्ट्रपति शिक्षा विद् डाक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।
वे दार्शनिक विद्वान शिक्षक एवं राजनीतिज्ञ भी थे। उनकी शिक्षा के प्रति समर्पित भाव को लेकर पूरे भारतवर्ष में शिक्षक दिवस मनाई जाती है। महान विभूति डॉ सर्वपल्ली के प्रति यही सच्ची श्रद्धा है।
धर्म शास्त्रों में महान गुरूओ का वर्णन मिलता है जिनमें भगवान परशुराम, द्रोणाचार्य, शुक्राचार्य,सादिपनी, विश्वामित्र सहित अन्य गुरु शामिल रहे हैं कलयुग में गुरू नानक, गोविंद सिंह, महावीर बुद्ध जैसे महान गुरूओ का जिक्र मिलता है।कबीर दास जी ने कहा है –गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागूं पाय…. अथवा सब धरती कागद करूं लेखनी सब बनराय…. गुरु गुण लिखा न जाये।यह कहावत गुरु के महिमा को उजागर करता है। गुरु महान होते हैंउनका दर्जा भगवान से भी उंचा है।
गुरूजनो के सम्मान में स्थानीय शासकीय कन्या हायर सेकेण्डरी स्कूल स्वामी आत्मानंद विद्यालय के अलावा निजी शैक्षणिक संस्थान नेहरू बाल मंदिर, एचिव्हर पब्लिक स्कूल गुरूकूल, सरस्वती शिशु मंदिर में शिक्षक दिवस मनाया गया। इस मौके पर छात्र छात्राओं ने अपने गुरुजनों के सम्मान में उन्हें उपहार अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किये। शिक्षकों ने अपने व्याख्यान में गुरू शिष्य के महता को समझाया।शिक्षक दिवस के मौके पर स्कूली बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम में शिक्षाप्रद नाटक पेश किये। खेलकूद का आयोजन हुआ। इस तरह से उमगता के साथ शिक्षक दिवस मनाई गई।



