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पितृ पक्ष में क्यों जरूरी है पितरों को जल अर्पित करना, जानें महत्व और नियम….

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हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व है. हर वर्ष यह भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि के बाद से शुरू होता है. इस समय लोग अपने पितरों को याद करने, उनकी आत्मा की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध करते हैं. मान्यता है कि पितृ पक्ष के दौरान पितर 16 दिनों के लिए धरती पर आते हैं. ऐसे में जो व्यक्ति नियमों का पालन करते हुए विधिविधान से पूर्वजों का श्राद्ध और तर्पण करता है, उसे पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. इस दौरान पितरों को जल अर्पित करना शुभ माना जाता है. कहा जाता है कि इससे पितर प्रसन्न होते हैं और घर में खुशहाली बनी रहती है.

पितरों को जल अर्पित करने का नियम:- पितृ पक्ष में तर्पण करने के दौरान व्यक्ति को दक्षिण दिशा की ओर मुख करना चाहिए. हाथ में जल, तिल और कुश लेकर पितरों का स्मरण करते हुए तर्पण करें. जल अर्पित करते समय “ॐ पितृदेवाय नमः” मंत्र का जाप करना शुभ होता है. तर्पण के लिए तांबे के लोटे का प्रयोग सबसे उत्तम माना गया है.

कुतुप वेला का महत्व:- पितरों को जल अर्पित करने का सबसे अच्छा और सही समय कुतुप वेला है. यह समय प्रातः सूर्योदय के बाद से लेकर लगभग दोपहर 12 बजकर 24 मिनट तक रहता है. इसी समय तर्पण करना सबसे फलदायक माना गया है.

पितृ पक्ष का महत्व:- मान्यता है कि पितृ पक्ष में जल अर्पण करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है. इससे घर में खुशहाली और सफलता आती है तथा पितरों का आशीर्वाद सदैव परिवार पर बना रहता है.

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