Home छत्तीसगढ़ भाजपा नेताओं की बौखलाहट ‘वोट चोरी’ शब्द पर कांग्रेस का पलटवार

भाजपा नेताओं की बौखलाहट ‘वोट चोरी’ शब्द पर कांग्रेस का पलटवार

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दंतेवाड़ा :  भाजपा मीडिया प्रभारी द्वारा कांग्रेस पर लगाए गए आरोप को लेकर जिला कांग्रेस मिडिया प्रभारी मनीष ठाकुर ने तीखा पलटवार किया है।मनीष ने कहा है कि भाजपा के पास आज जनता को बताने के लिए कोई कामकाज व उपलब्धि नहीं बचा है, इसलिए वह शब्दों के मायाजाल में उलझाकर जनता को गुमराह करने की नाकाम कोशिश कर रही है जो कि हास्यास्पद है और तथ्यों से परे हैं। दरअसल भाजपा नेताओं की बौखलाहट ही यह साबित करती है कि ‘वोट चोरी’ का मुद्दा सीधे उनकी राजनीतिक अंतरात्मा को चोट पहुँचा रहा है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि “वोट चोरी” कोई असंसदीय शब्द नहीं, बल्कि भाजपा की कार्यप्रणाली और चुनावी धांधलियों को लेकर जनता की पीड़ा की सच्ची अभिव्यक्ति है। आज हर नागरिक जानता है कि भाजपा लोकतंत्र की मर्यादाओं का उल्लंघन कर सत्ता में बने रहने के लिए किस तरह से शासन प्रशासन का दुरुपयोग कर रही है । मनीष ने कहा कि भाजपा लोकतंत्र की दुहाई जरूर देती है, लेकिन व्यवहार में उसकी राजनीतिक खरीद-फरोख्त, दबाव, तोड़फोड़ और हेरा-फेरी पर आधारित है। यही कारण है कि जब कांग्रेस ने जनता की आवाज़ को सामने रखा तो भाजपा को अपनी असलियत का आईना दिखना नागवार गुजरा।

कांग्रेस मिडिया प्रभारी ने कहा कि भाजपा को लोकतंत्र और भाषा की गरिमा का पाठ पढ़ाने का कोई अधिकार नहीं है। जिस पार्टी ने लोकतंत्र की आत्मा – संविधान और चुनावी प्रक्रिया – को बार-बार ठगा है, वही आज ‘वोट चोरी शब्द’ पर आपत्ति दर्ज कर रही है।मनीष ने कहा कि भाजपा की पूरी राजनीति जुमलों, झूठे वादों और लोकतांत्रिक संस्थाओं के दुरुपयोग पर टिकी हुई है। जब-जब भाजपा हार के डर से घबराती है, तब-तब संवैधानिक संस्थाओं और चुनावी प्रक्रिया को अपने पक्ष में मोड़ने का प्रयास करती है। यही कारण है कि जनता भाजपा पर भरोसा खो चुकी है। कांग्रेस मिडिया प्रभारी ने आगे कहा कि भाजपा नेताओं को शब्दों की मर्यादा की चिंता तब नहीं होती जब उनके ही बड़े नेता संसद व सार्वजनिक मंचों से अमर्यादित, असंसदीय और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हैं।

भाजपा नेताओं का इतिहास भाषा की गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ खिलवाड़ करने का रहा है।दरअसल ‘वोट चोरी’ शब्द कांग्रेस की वैचारिक दरिद्रता नहीं बल्कि भाजपा की लोकतांत्रिक दरिद्रता का आईना है। भाजपा लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर जनता का भरोसा तोड़ चुकी है और अब केवल झूठे नैरेटिव व सस्ते आरोपों के सहारे जनता को गुमराह करने का काम कर रही है।कांग्रेस पार्टी स्पष्ट करती है कि लोकतंत्र की रक्षा और जनता की आवाज़ बुलंद करना उसका कर्तव्य है और इसी जिम्मेदारी के तहत भाजपा की जनविरोधी राजनीति का पर्दाफाश किया जा रहा है।भाजपा की भाषा और आचरण ही असंसदीय हैं, क्योंकि उन्होंने विपक्ष की आवाज दबाने का काम किया।भाजपा की वैचारिक दरिद्रता यह है कि वह हर आलोचना को “ओछी राजनीति” बताकर खारिज कर देती है।वास्तविकता यह है कि भाजपा जनता का विश्वास खो चुकी है और आगामी चुनावों में हार सुनिश्चित देखकर अब कांग्रेस पर निराधार आरोप लगा रही है।मनीष ने कहा कि “वोट चोरी” शब्द भाजपा के काले कारनामों की पहचान बन चुका है और यह जनता की जुबान पर है। भाजपा लाख सफाई दे, लेकिन सत्य यह है कि भाजपा ने लोकतंत्र की जड़ों को खोखला किया है।

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