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एक पर्व, कई परंपराएं, भारत के अलग-अलग राज्यों में कैसे मनता है खुशियों भरा दशहरा?

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साल 2025 में विजयादशमी यानी दशहरा का पर्व 2 अक्टूबर, गुरुवार के दिन मनाया जाएगा. यह त्योहार सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि भारत की सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत और ‘बुराई पर अच्छाई की जीत’ के संदेश का प्रतीक है. देश के कोने-कोने में इसे मनाने का तरीका अलग है, हर राज्य की अपनी अनूठी परंपराएं और लोक-रंग हैं, जो इस पर्व को और भी खास बनाते हैं. आइए, जानते हैं कि भारत के अलग- अलग राज्यों में खुशियों भरा दशहरा कैसे मनाया जाता है.

उत्तर भारत : रावण दहन और रामलीला:- उत्तर भारत में दशहरे की सबसे प्रमुख परंपरा रावण दहन है. दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार और मध्य प्रदेश में जगह-जगह मेले लगते हैं और रामलीला का आयोजन होता है. रामलीला मंचन के बाद विशाल पुतलों के रूप में रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण का दहन किया जाता है. हजारों लोग इस आयोजन के साक्षी बनते हैं. माना जाता है कि यह परंपरा बुराई को जलाकर नष्ट करने और जीवन में अच्छाई को अपनाने का संदेश देती है.

महाराष्ट्र : शमी पूजन और सोने का आदान-प्रदान:- महाराष्ट्र में दशहरे पर आपस में सोना (आम की पत्तियां) बांटने की परंपरा है. लोग इसे समृद्धि का प्रतीक मानते हैं. इसके अलावा “शमी वृक्ष” की पूजा की जाती है. माना जाता है कि इसी वृक्ष में पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान अपने अस्त्र-शस्त्र छुपाए थे. इस दिन लोग आपसी रिश्तों को और मजबूत करने के लिए शुभकामनाओं का आदान-प्रदान करते हैं.

गुजरात : नवरात्रि के बाद विजय उत्सव:- गुजरात में नवरात्रि का समापन दशहरे के साथ होता है. यहां पर गरबा और डांडिया की धूम नवरात्रि के नौ दिनों तक रहती है, और दशहरे के दिन देवी दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन कर विजय का उत्सव मनाया जाता है.

कर्नाटक: मैसूर दशहरा:- कर्नाटक का मैसूर दशहरे विश्व प्रसिद्ध है. यहां दशहरा 10 दिनों तक बड़े धूमधाम से मनाया जाता है. मैसूर पैलेस को हजारों बल्बों से सजाया जाता है. दसवें दिन “जंबू सवारी” नामक शोभायात्रा निकाली जाती है, जिसमें हाथियों, घोड़ों और सांस्कृतिक झांकियों का विशेष प्रदर्शन होता है.

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना : अलंकृत मूर्तियां और मेले:- इन राज्यों में विजयादशमी पर देवी की विशेष पूजा होती है. गांव-गांव में मेले लगते हैं और लोग मां दुर्गा की अलंकृत प्रतिमाओं का विसर्जन करते हैं. कई जगह “बोम्मालू कोलु” की परंपरा है, जिसमें घरों में देवी-देवताओं की मूर्तियों को सजाकर प्रदर्शित किया जाता है.

हिमाचल प्रदेश : कुल्लू दशहरा:- हिमाचल प्रदेश के कुल्लू का दशहरा बेहद खास है. यहां रावण दहन नहीं होता, बल्कि इसे देवताओं का मेला माना जाता है.इस दौरान सैकड़ों स्थानीय देवी-देवताओं की मूर्तियां या रथ एक साथ इकट्ठा किए जाते हैं और विशाल शोभायात्रा निकाली जाती है. यह उत्सव पूरे एक सप्ताह तक चलता है.

 

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