रिपोर्टर मुन्ना पांडेय सरगुजा : शक्ति उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्र के मौके पर अश्वनी शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि से लेकर नौवमी तिथि तक किये जाने वाले माता रानी की पूजा अनुष्ठान पर 1 अक्टूबर दिन बुधवार को विराम लग गया अंतिम दिन नवमी तिथि को देवी मंदिरो में विशेष पूर्णाहुति हवन पूजन के साथ मंदिरों के पट बंद कर दिये गये। देवी माता के नौ रूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी चंद्रघंटा, कूष्मांडा स्कंदमाता, कात्यायनी कालरात्रि ,महागौरी और सिद्धिदात्री रूपों के लगातार किये जाने वाले पूजा अनुष्ठान का सिलसिला थम गया। मंदिरो में प्रज्वलित मनोकामना दीप कलशों को बूझा कर विसर्जित किया गया इस मौके पर नौ दिनों तक उपवास रख कर देवी माता की पूजा अर्चना करने वाले भक्तों ने कन्या भोज कराया तथा व्रत तोड़ कर खुद पारण किया। नवमी तिथि को नगर के प्राचीन महामाया मंदिर में राजघराने के सदस्यों ने अपने कुल देवी के पूजा अर्चना किये। रिवाज के मुताबिक देवी मंदिर से खन्ड़ा (खडग) अर्थात शस्त्र तलवार को ससम्मान गाजे बाजे के साथ राजमहल में ले जान की रस्म अदा की गई।
ग्रामीण क्षेत्रों में माता भक्तों द्वारा नीज घरों में जवारा बोकर नौ दिनों तक जगराता कर देवी माता की सेवा भजन करने वाले श्रद्धालुओं ने मांदर ढ़ोल नगाड़े के धून पर देवी जसगीत गाते जवारा को नदी तालाब जलसरोवरो में विधिवत ठंडा किया। वहीं दूर्गा मंडप बाजार पारा तथा नवचेतना दूर्गा पंडाल बस स्टैंड जूना लखनपुर अन्य गांवों के दूर्गा पंडालों में माता रानी की पूजा यथावत जारी है। दो अक्तूबर दिन गुरुवार दसवीं तिथि को समुचे देश में विजयादशमी दशहरा पर्व मनाई जाएगी लेकिन परम्परानुसार नगर लखनपुर में एक रोज बाद एकादशी तिथि शुक्रवार को विजयादशमी दशहरा मनाया जायेगा। नगर लखनपुर तथा आसपास का गांव शक्ति के भक्ति में डूबा हुआ है एवं चारों तरफ भक्तिमय वातावरण बनी हुई है।नवमी तिथि को नवाखाने के चलन को कायम रखते हुए लोगों ने नये चावल से बने भोजन तथा पकवान ग्रहण कर नवा खाने की रस्म अदा किये। इस तरह से शारदीय नवरात्रि का सफर सम्पन्न हुआ।



