Home छत्तीसगढ़ ग्रामीण दशहरा में भस्मीभूत हुआ एक और रावण

ग्रामीण दशहरा में भस्मीभूत हुआ एक और रावण

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रिपोर्टर मुन्ना पांडेय सरगुजा : लगेंगे हर बरस रावण के चिंताओं पर मेले। बाकी उसका यही निशा होगा ।। अम्बिकापुर ,लखनपुर के बाद ग्राम नवापारा में साल के आखरी विजयादशमी दशहरे का आयोजन 4 अक्टूबर दिन शनिवार को हुआ।
गाजे बाजे के साथ नृत्य करते मां दुर्गा के प्रतिमाओं का विशाल शोभायात्रा निकाली गई। बिलासपुर मुख्य मार्ग से होकर अमगसी जुड़वानी के गलियारों से गुजरते शोभायात्रा नवापारा खेल मैदान में पहुंची जहां असत्य पर सत्य तथा बुराई पर अच्छाई के जीत का प्रतीक रावण दहन कार्यक्रम का आयोजन लुण्ड्रा विधायक मा0प्रबोध मिंज के आतिथ्य एवं जिला पंचायत सदस्य विजय अग्रवाल जंप अध्यक्ष श्रीमती शशी कला सिंह उपाध्यक्ष कामेश्वर राजवाड़े मंडल महामंत्री विक्रम सिंह के विशिष्ट आतिथ्य में आयोजित हुई ।
इस मौके पर मुख्य अतिथि प्रबोध मिंज ने आसपास से आये अपार जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा — भगवान श्री राम ने अहंकारी रावण का वध कर संसार के मानव जाति का कल्याण किया था दुनिया को रावण केआतंक से निजात दिलाते हुए भय मुक्त किया था ‌। दरअसल रावण दहन बुराई पर अच्छाई के जीत का प्रतीक माना गया है हमें इससे प्रेरणा लेते हुए अपने अंदर छुपे बुराई रूपी रावण का भी अंत करना चाहिए।

मन और विचारों के दुर्गुणों को भी कुंभकरण और मेघनाथ की तरह भस्म कर देना चाहिए। हमें संकल्प लेनी चाहिए कि समाज में फैले उन बुराईयों को मूल से खत्म करना है। जो इनसानियत और मानवता को शर्मसार कर रहे।दशहरा पर्व हमें आपसी भाईचारा सौहार्द के मानवीय मूल्यों का संदेश देता है।दूसरे मचासीन अतिथियों ने भी कार्यक्रम में उपस्थित जनसमूह को सम्बोधित किया।कुछ जानकारो ने नवापारा में मनाया जाने वाला दूर्गा पूजा के इतिहास का जिक्र करते हुये बताया- यह आयोजन आसपास के ग्राम अमगसी, जुड़वानी, नरकालो के तत्वावधान में साल 1996 से आरंभ हुई है अब नन्हा पौधा विशाल दरख़्त बन चुका है। ग्रामीण दशहरा में काफी मशहूर हो चुका है। जाहिर है कि अम्बिकापुर लखनपुर के बाद नवापारा में आखरी विजयादशमी दशहरा पर्व मनाई जाती है जिसमें इर्द-गिर्द ग्रामीण अंचल के ही नहीं अपितु दूसरे शहरों से भी दर्शनार्थी आते हैं।

भव्य मेले का लुत्फ उठाते है।
साथ ही अपने सामानों का तिजारत करने दूकानदार व्यापारी भी मेले में पहुंचते हैं।
नवापारा दशहरे की खासियत है कि यह सबसे आखिर में आयोजित होती है इसलिए यहां सबसे अधिक भीड़भाड़ होती है । यहां भीड़ साल दर साल बढती जा रही है बहरहाल हो रहे झमाझम बारिश में दशहरे का जो नजारा था वाकई बहुत ही प्रशंसनीय था । बरसते पानी में भी लोगों का जो उत्साह था देखते ही बन रहा था। ग्रामीण दशहरा में जलने वाला आखरी रावण आग और पानी के संयोग से किसी तरह भस्मीभूत हुआ। देर रात दूर्गा प्रतिमाओं को जलसरोवर में विसर्जित किया गया। इस मौके पर मंत्री प्रतिनिधि राकेश अग्रवाल राहुल अग्रवाल दिनेश साहू चंद्रिका प्रसाद यादव अजीत सिंह राधेश्याम ठाकुर रवि महंत प्रेम सिंह सुनील कुमार सिंह जयंती सिंह आदि उपस्थित रहे।

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