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वैकुंठ चतुर्दशी पर सिर्फ 52 मिनट का शुभ मुहूर्त, रवि योग में पूजा करने से बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा

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नई दिल्ली :  हर साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर वैकुंठ चतुर्दशी मनाई जाती है। इस साल मंगलवार 04 नवंबर को वैकुंठ चतुर्दशी है। सनातन धर्म में वैकुंठ चतुर्दशी का खास महत्व है। कहते हैं कि कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर भगवान विष्णु बाबा की नगरी काशी आकर देवों के देव महादेव की पूजा और साधना की थी।

ज्योतिषियों की मानें तो कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि यानी वैकुंठ चतुर्दशी पर पूजा के लिए सिर्फ 52 मिनट का शुभ मुहूर्त है। वहीं, वैकुंठ चतुर्दशी के दिन रवि योग समेत कई मंगलकारी संयोग बन रहे हैं। इन योग में भगवान शिव और विष्णु जी की पूजा करने से लक्ष्मी नारायण जी की विशेष कृपा बरसेगी। आइए, वैकुंठ चतुर्दशी का शुभ मुहूर्त और योग जानते हैं-

वैकुंठ चतुर्दशी शुभ योग ज्योतिषियों की मानें तो वैकुंठ चतुर्दशी पर सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग, और अमृत सिद्धि योग समेत कई मंगलकारी संयोग बन रहे हैं। इसके साथ ही भद्रावास योग का संयोग बन रहा है। इन योग में भगवान विष्णु और शिवजी की पूजा करने से साधक को अक्षय फल मिलेगा।

  1. रवि योग- सुबह 06 बजकर 08 मिनट से दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक
  2. सर्वार्थ सिद्धि योग- 04 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 34 मिनट से
  3. अमृत सिद्धि योग- 04 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 34 मिनट से
  4. अभिजीत मुहूर्त- दिन में 11 बजकर 24 मिनट से दोपहर 12 बजकर 09 मिनट तक
  5. भद्रावास- रात10 बजकर 36 मिनट से पूरी रात

वैकुंठ चतुर्दशी पूजा योग 

सनातन शास्त्रों में निहित है कि वैकुंठ चतुर्दशी पर निशिता काल में जगत के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इसके लिए निशिता काल में भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है। वैकुंठ चतुर्दशी पर निशिता काल में पूजा के लिए सिर्फ 52 मिनट का समय है। निशिता काल देर रात 11 बजकर 39 मिनट से लेकर देर रात 12 बजकर 31 मिनट तक है। इस दौरान साधक भगवान विष्णु की भक्ति भाव से पूजा कर सकते हैं।

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