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सफलता की कहानी : लाई बभनी नाला में एनीकट निर्माण से आई हरियाली की नई सुबह

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सुरेश मिनोचा एमसीबी : छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के विकासखंड मनेन्द्रगढ़ अंतर्गत ग्राम लाई के बभनी नाला में महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत ऐनीकट निर्माण एवं नाला गाद हटाने का कार्य कर ग्रामीण जीवन में स्थायी परिवर्तन लाया गया है लगभग 16.97 लाख रुपए की लागत से निर्मित यह एनीकट परियोजना ग्राम पंचायत एजेंसी द्वारा पूर्ण की गई है ।

खरीफ से रबी तक पहुंची समृद्धि की राह
पूर्व में बभनी नाला का पानी बरसात के बाद सीधे हसदेव नदी में बहकर चला जाता था जिससे आसपास की भूमि शीघ्र सूख जाती थी और किसान केवल खरीफ फसल तक ही सीमित रहते थे रबी सीजन में जल की उपलब्धता न होने के कारण अधिकांश भूमि अनुपजाऊ हो चुकी थी एनीकट निर्माण के बाद अब पानी का ठहराव संभव हुआ है जिससे लगभग 5.60 हेक्टेयर भूमि सिंचित हो रही है इस परियोजना ने किसानों को खरीफ के साथ-साथ रबी और अन्य फसलों की खेती का अवसर प्रदान किया है

सामूहिक प्रयास से बदला ग्रामीण परिदृश्य
महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत ग्राम पंचायत एजेंसी द्वारा यह कार्य समुदाय की मांग और तकनीकी सर्वेक्षण के आधार पर किया गया । कार्य के दौरान पंचायत प्रतिनिधियों तकनीकी सहायकों और स्थानीय श्रमिकों ने समर्पण और निष्ठा के साथ भागीदारी निभाई ग्रामीणों ने भी श्रमदान एवं निगरानी में सक्रिय सहयोग देकर इसे सफल बनाया यह सामूहिक प्रयास अब ग्राम लाई में जल संरक्षण और विकास का उत्कृष्ट उदाहरण बन चुका है

किसानों की बढ़ी आमदनी, जीवन में आई समृद्धि
अब बभनी नाला के एनीकट से संचित जल के कारण किसान धान के साथ-साथ आलू टमाटर मटर बैंगन मिर्च जैसी सब्जियों की खेती कर रहे हैं जिससे उनकी कृषि उत्पादकता और आर्थिक स्थिति दोनों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है ग्राम लाई के लाभार्थी रामचरण और शिवप्रसाद बताते हैं कि अब वे लगभग 1.20 एकड़ भूमि में दोहरी फसल ले पा रहे हैं एनीकट के पानी से सब्जी उत्पादन कर उन्हें प्रति सप्ताह लगभग 3500 रुपए की अतिरिक्त आमदनी हो रही है पहले जो किसान केवल वर्षा पर निर्भर थे अब वे आत्मनिर्भर बन चुके हैं

सतत विकास की मिसाल बनी लाई पंचायत
एनीकट निर्माण से क्षेत्र में भूमिगत जलस्तर बढ़ा है मिट्टी की नमी और उत्पादकता में सुधार हुआ है किसानों की आमदनी में वृद्धि और रोजगार के नए अवसर खुले हैं यह परियोजना इस बात का सशक्त प्रमाण है कि सामूहिक प्रयास तकनीकी समन्वय और समुदाय की सहभागिता से ग्रामीण अंचल में जल एवं कृषि विकास की नई दिशा संभव है लाई बभनी नाला का यह एनीकट अब जल संरक्षण आत्मनिर्भरता और सतत ग्रामीण विकास की प्रेरक मिसाल बन चुका है ।

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