Home छत्तीसगढ़ काैंवाझर गांव की शासकीय भूमि व तालाब बचाने ग्रामीण पहुँचे कलेक्टोरेट

काैंवाझर गांव की शासकीय भूमि व तालाब बचाने ग्रामीण पहुँचे कलेक्टोरेट

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कलेक्टोरेट परिसर में ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन व विधायक के खिलाफ लगाए मुर्दाबाद के नारे, साैंपा ज्ञापन

महासमुंद :  सोमवार को ग्राम काैंवाझर के ग्रामीणों ने कलेक्टोरेट पहुंच गांव की शासकीय भूमि एवं तालाब की अवैध खरीदी-बिक्री के विरोध में जमकर नारेबाजी की और कलेक्टोरेट में ज्ञापन साैंपा। पूर्व पार्षद पंकज साहू के नेतृत्व में पहुंचे ग्रामीणों ने बताया कि काैवाझर प.ह.नं.-07, रा.नि.मं.सिरपुर तहसील व जिला महासमुंद में स्थित वर्तमान ख.नं. 13/1, 19, 24, 28/1, 46/1, 47/1, 26, 27, 36/1, 8,9, 7 रकबा क्रमश: 3.540, 0.200, 0.510, 1.000, 5.540, 0.110, 0.020, 0.150, 1.810, 0.040, 2.550, 2.920, 0.220, 0.520, कुल रकबा 19.130 हे. भूमि का क्रय करने का साैदा हो चुका है। उक्त भूमि जो वन पट्टे की है। जो निर्मला बाई पति चोवालाल चंद्राकर, तोषण कुमार चंद्राकर, डेविड चंद्राकर पिता चोवालाल चंद्राकर, उमाबाई चंद्राकर पति रोहित चंद्राकर, रोमी चंद्राकर, लीना चंद्राकर एवं बृजमोहन चंद्राकर सभी पिता रोहित चंद्राकर तथा नरेश जलक्षत्री पिता महेश जलक्षत्री के नाम पर वर्तमान रिकार्ड में भूमिस्वामी मद में दर्ज है।

ग्रामीणों ने बताया कि उपरोक्त खसरे में कुछ खसरे शासन से प्राप्त पट्टे की भूमि है, जो कि निम्नानुसार है। वर्तमान खं.नं. 5,7,8,9, 13, 46, 48 जिसका पुराना ख. नं. 2/19, 2/16, 2/ 17, 2/20, 2/8, 2/13, 2/5, 2/6, 2/14, 2/9 का टुकड़ा, 2/10 का टुकड़ा, 2/10 का टुकड़ा बना हुुआ है। ख. न. 02 रकबा 50.88 एकड़ भूमि छोटे झाड़ जंगल मद में अधिकार अभिलेख 1955-56 में दर्ज है तथा वर्ष 1948-49 चकबंदी मिशल ख.नं. 02, रकबा 50.88 एकड़ भूमि घास भूमि घास मद में दर्ज है। उक्त भूमि को उपरोक्त लिखे गये व्यक्तियों के नाम से शासकीय पट्टे के रूप में बिना कोई शासन के मापदंड एवं कानून प्रक्रिया के पट्टा वितरित किया गया है, यह जाँच का विषय है।

ग्रामीणों ने बताया कि खसरा एवं रकबा की भूमि को बिना कलेक्टर के अनुमति बिक्री हेतु 30 अक्टूबर 2025 को एक समाचार पत्र में ईश्तहार प्रकाशन किया गया है, जो कि महासमुंद जिले के अखबार में प्रकाशित ना कराकर रायपुर के अखबार में प्रकाशित कराया गया है। ग्रामीणों ने कहा कि उक्त भूमि की खरीदी-बिक्री पर तत्काल रोक लगाया जाए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी नेता भूमि दलालों को संरक्षण दे रहे हैं।

ग्रामीणों ने कलेक्टर से उक्त भूमि की खरीदी – बिक्री पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। साथ ही चेतावनी भी दी है कि 7 दिवस के भीतर इस मामले में उचित पहल नहीं हुई तो काैंवाझर के समस्त ग्रामीण परिवार सहित कलेक्टोरेट में आकर धरना प्रदर्शन करेंगे। इस दौरान सरपंच गेंदलाल जांगड़े, संतोष, प्यारेलाल, उदेराम ढीढी, रमेंद्र, रामनाथ ढीढी, संतोष कुमार, अशोक, संतलाल बंजारे, दिलीप जोगी, तिरिथ जोशी, रामकुमार, कीर्तन, कार्तिक, तुलसीराम, जीवन कुर्रे, किशन कुर्रे, चंद्रकुमार, दिलीप जांगड़े, रामूदास, धर्मेंद्र, तेजराम जांगड़े, कुलेश्वर ध्रुव, राजकुामर परमार, गोकुलदास मानिकपुरी, जोधन यादव, गोवर्धन यादव, सालिक राम, अरूण, फिरतुराम, महेश विश्वकर्मा, दिनेश यादव, प्रमोद कुमार सहित डेढ़ सौ की संख्या में ग्रामीण ज्ञापन साैंपने पहुँचे थे।

फर्जी तरीके से बेचने का हुआ सौदा
पूर्व पार्षद व समाजसेवी पंकज साहू ने कहा कि ग्रामीणों के बिना जानकारी गांव के लगभग 60 एकड़ भूमि को फर्जी तरीके से बेचने का साैदा किया गया है। यदि उक्त भूमि की रजिस्ट्री हो गई तो गाँव में चलने का रास्ता नहीं बचेगा। वहीं, निस्तारी तालाब भी पाट दिया जाएगा। रायपुर के भू माफियाओं द्वारा कूट रचना कर गांव के कुछ लोगों के साथ मिलीभगत कर शासकीय भूमि, छोटे झाड़ के जंगल व जिस जमीन पर तालाब है, उसे कूट रचित दस्तावेज बनाकर साैदा किया गया है।

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