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अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड बन रहा मोटापे और हार्मोनल इंबैलेंस की वजह, स्वाद के लिए सेहत से न करें समझौता

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आज के समय में सुविधाजनक और स्वादिष्ट दिखने वाला जंक फूड हमारी दिनचर्या में तेजी से जगह बना चुका है। खासकर दिल्ली जैसे बड़े शहरों में इसकी खपत इतनी तेजी से बढ़ रही है कि यह अब एक गंभीर स्वास्थ्य संकट का रूप ले चुकी है। चिप्स, नूडल्स, नमकीन, कोल्ड ड्रिंक, चॉकलेट और ब्रेकफास्ट सीरियल जैसी पैकेट बंद चीजें बच्चों और युवाओं की पहली पसंद बन गई हैं, लेकिन इनके पीछे छिपे खतरे बहुत गहरे हैं।

भारत में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स की बम्पर बिक्री
पिछले लगभग पंद्रह वर्षों में भारत में पैक्ड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स की बिक्री कई गुना बढ़ गई है। द लांसेट की नई रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष इन उत्पादों का बाजार 50 बिलियन डॉलर के करीब पहुंच सकता है। यह तेज बढ़ोतरी विशेषज्ञों के लिए बड़ी चिंता बन चुकी है, क्योंकि इसका सीधा संबंध बढ़ते मोटापे और उससे जुड़ी बीमारियों से है।

मोटापा और हार्मोनल असंतुलनजंक फूड में पोषण का संतुलन लगभग गायब होता है। इनमें विटामिन, फाइबर या प्राकृतिक तत्वों की बजाय ज्यादा चीनी, नमक, तेल और आर्टिफिशियल रंग होते हैं। यही वजह है कि इन्हें खाने से पेट भरने के बावजूद शरीर को आवश्यक ऊर्जा नहीं मिलती, बल्कि ऐसी चीजें हमें बार-बार खाने की आदत डाल देती हैं। धीरे-धीरे यह आदत मोटापा, हार्मोनल असंतुलन और सेहत से जुड़ी अन्य समस्याओं को जन्म देती है।

कम समय में ही दोगुना बढ़ा मोटापादेश में मोटापे की स्थिति चिंताजनक है। आंकड़े बताते हैं कि पुरुषों में मोटापा 12 प्रतिशत से बढ़कर 23 प्रतिशत तक पहुंच गया है। वहीं महिलाओं में यह 15 प्रतिशत से बढ़कर 24 प्रतिशत हो चुका है। यानी कुछ ही वर्षों में दोनों ही श्रेणियों में मोटापा लगभग दोगुना बढ़ा है। यह बढ़ोतरी विशेषज्ञों के मुताबिक उतनी ही खतरनाक है, जितनी प्रदूषण से फेफड़ों पर पड़ने वाली मार।

अब नहीं संभले तो कब?इन सभी बातों से साफ है कि जंक फूड का बढ़ता बाजार सिर्फ स्वाद का मामला नहीं, बल्कि एक व्यापक स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। जरूरत है कि लोग जागरूक हों, बच्चों में सही खान-पान की आदतें विकसित की जाएं और घर में स्वास्थ्यवर्धक विकल्पों को प्राथमिकता दी जाए। अगर अभी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में मोटापा और उससे जुड़ी बीमारियां और भी अधिक तेजी से बढ़ सकती हैं।

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