रिपोर्टर मुन्ना पांडेय सरगुजा : खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर समितियों में पंजीबद्ध किसानों से धान खरीदी किये जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। लेकिन गिरदावारी में किसानों के कास्तकारी किये जाने वाले जमीन की रकबा घटने से क्षेत्र के किसान काफी आक्रोशित है। रकबा घटने से ख़फ़ा किसानों ने आज 24 नवंबर दिन सोमवार को तहसील कार्यालय में दस्तक दिया। किसानों की भारी भीड़ लगी रही। ग्राम सिरकोतंगा, पुहपुटरा, गुमगरा कला, भरतपुर, बिनकरा, गणेशपुर, कोईलार टिकरा, लहपटरा, पलगढी सहित आसपास अनेक राजस्व ग्रामो से आये ग्रामीण किसान अपनी रकबा घटने सम्बंधित समस्याएँ लेकर तहसील पहुँचे दरअसल
वर्ष 2025-26 धान खरीदी सीजन में किसान अपनी धान बेचने को लेकर बेहद उत्साहित थे, लेकिन सरकारी प्रक्रियाओं में अव्यवस्था, तकनीकी खराबी और रजिस्ट्रेशन संबंधी अड़चनों ने किसानों की उम्मीदों उत्साह पर पानी फेर दिया है।
किसानों की मुख्य खास समस्याएँ —
1- गिर्दावरी और पंजीयन में भारी गड़बड़ी–
किसानों ने बताया कि इस बार गिर्दावरी (भूमि सत्यापन) में कई त्रुटियाँ सामने आईं हैं।
जहाँ पहले उनका कास्तकारी किये जाने वाले जमीनो की तमाम रकबा सही तरीके से दर्ज था। वहीं इस बार सिस्टम में रकबा कम दिखाया जा रहा है । जिससे धान की कुल उपज बेचने में किसानों को कठिनाइयां आ रही है। रकबा अचानक घट गया जो किसानो के साथ नाइंसाफी है ।
किसानों का आरोप है
“ज़मीन वही है, लेकिन सिस्टम में रकबा कम दिखाकर हम किसानों का सीधा नुकसान किया जा रहा है।”
2 — DSC–RC सत्यापन और Agree-Stack में तकनीकी खराबी
रजिस्ट्रेशन की अनिवार्य प्रक्रियाएँ जैसे DSC और RC सत्यापन बार-बार फेल हो रही हैं।
Agree-Stack पोर्टल में तकनीकी गड़बड़ी के कारण approval और update लंबे समय से अटका हुआ है
3– सोसायटी और तहसील के चक्कर में फँसे किसान
किसानों ने बताया कि उन्हें कभी सोसायटी से तहसील कार्यालय भेजी जा रही है और तहसील कार्यालय से वापस सोसायटी भेजी जा रही है यही प्रक्रिया चल रहा है। सोसायटी और तहसील के इस चक्कर में किसानों का समय, पैसा, मेहनत बर्बाद हो रहा है।
4- कम धान बेचने की मजबूरी–
रकबा कम दर्ज होने और पंजीयन में होने वाली त्रुटियों के कारण पिछले सत्र के तूलना में किसान अपना पूरा धान नहीं बेच पाने की कगार पर हैं ।जहिरी तौर पर किसानों को सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
किसानों ने चेताया — किसानों ने साफ शब्दों में कहा यदि हम किसानों की समस्या समय रहते हल नहीं हुई तो निश्चित तौर पर चक्का जाम की स्थिति निर्मित होगी। यदि इन समस्याओं का समाधान समय पर नहीं किया गया, तो आगामी 27 नवंबर को NH-130, लहपटरा गांधी चौक के पास बड़े पैमाने में चक्का जाम किया जाएगा।
यह आंदोलन धर्मेंद्र झरिया (पूर्व जनपद सदस्य, वर्तमान जनपद सदस्य प्रतिनिधि) एवं
सूरज सिंह पैकरा (पूर्व सरपंच, पलगढी) के नेतृत्व में किया जाएगा। किसानों ने बताया कि उन्होंने आज तहसील कार्यालय, लखनपुर में ज्ञापन सौंप दिया है और प्राप्ति रसीद (Pawati) भी ले ली है। किसानों में नाराज़गी तो है । लेकिन उनके दिलों में आशा भी बाकी है। पुहपुटरा सिरकोतंगा, पलगढी, लहपटरा, भरतपुर, गुमगरा कला और अन्य गाँवों से आए किसानों ने कहा कि वे कई दिनों से तहसील कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
किसानों का बयान—
“हमारा काम एक साधारण अपडेट से हो सकता है, लेकिन न सोसायटी अपडेट कर रही है, न तहसील! हम जाएँ तो कहा जाएँ ?” तहसीलदार ने समाधान का भरोसा दिलाया है किसानों की भारी भीड़ और बढ़ते आक्रोश को देखते हुए तहसीलदार ने कहा— सभी लंबित मामलों का शीघ्र निराकरण किया जाएगा संबंधित सोसायटियों को तत्काल निर्देश भेजे गए हैं पंजीयन की त्रुटियों को सुधारकर तुरंत अपडेट किया जाएगा
तकनीकी समस्याओं को हल करने के लिए विशेष टीम तैनात की जा रही है ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि अब शायद उनकी समस्याओं का समाधान जल्दी हो सकेगा। ज्ञापन सौंपने के दौरान किसानों के ओर से धर्मेंद्र झरिया (पूर्व जनपद सदस्य, वर्तमान जनपद सदस्य प्रतिनिधि) सूरज सिंह पैकरा (पूर्व सरपंच, पलगढी) राजेश पैकरा (सरपंच, लहपटरा) लक्ष्मण रजवाड़े कैलाश साहू सुरेंद्र झरिया भरत यादव उदय सिंह दिगंबर पैकरा, और सैकड़ों की संख्या में किसान उपस्थित रहे। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) वंश सिंह नेताम ने अपने चर्चा में बताया कि — पोर्टल में improval या अन्य तकनीकी खामी होगा तो जल्दी से कार्य कराएंगे आवेदन देंगे कोइ दिक्कत नहीं होगा। रकबा कम होने से किसानों का आक्रोश फूट पड़ा है। देखना होगा कि इस मसले का अंजाम क्या होगा।



