महासमुंद: राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 के लिए जमीन गाइडलाइन के तहत भूमि बाजार मूल्य में की गई अप्रत्याशित वृद्धि को वापस लेने व समीक्षा करने की मांग जमीन कारोबारियों व नागरिको ने की है। सोमवार को जमीन कारोबारियों नागरिकों ने तहसीलदार को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। शहर के लोहिया चौक से जमीन कारोबारी व नागरिक रैली निकालकर एसडीएम कार्यालय पहुचे। जहां नारेबाजी के बाद तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य में भूमि के बाजार मूल्य के पुनर्निर्धारण हेतु केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड छत्तीसगढ़, रायपुर द्वारा वर्ष 2025-26 के लिए गाइडलाइन दरें 20 नवम्बर से प्रभावशील की गई हैं, लिखा कि यह दरें पूर्ण रूप से अव्यावहारिक है एवं मनमानीपूर्ण है। व्यवहार के विपरीत, शासन द्वारा जारी नई वार्षिक बाजार मूल्य दर (एएमवीआर) में विगत वर्षों की तुलना में 300 से 500 प्रतिशत तक की अव्यावहारिक वृद्धि की गई है। जबकि पूर्व में यह वृद्धि लगभग 47 प्रतिशत थी। इस अत्यधिक वृद्धि से विक्रय विलेख (सेल डीड) का खर्च कई गुना बढ़ गया है, जो क्रेता एवं विक्रेता दोनों के ही हितों के विरुद्ध है।
बताया कि यह वृद्धि बिना किसी पूर्व अधिसूचना जारी किए और आम जनता से पर्याप्त आपत्तियों एवं सुझावों को आमंत्रित किए बिना ही गई है, जो प्रक्रियात्मक रूप से त्रुटिपूर्ण है। यह निर्णय केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड द्वारा मनमाना प्रतीत होता है और पारदर्शिता के सिद्धांतों का उल्लंघन है। ज्ञापन सौपने वालो में पप्पू साहू, हेमंत लुनिया, शैलू स्वामी, राजेश नायक, आशीष श्रीवास्तव, उमेंद्र औसर, श्री सिन्हा, अमित समेत बड़ी संख्या कारोबारी व नागरिक उपस्थित रहें।
गाइडलाइन लागू होने के बाद पंजीकरण हो गया आधा
नागरिको के अनुसार नई गाइडलाइन के लागू होने के बाद से जिले पंजीयन कार्यालय में होने पंजीकरण आधा हो गया है। इससे राज्य को राजस्व की भारी क्षति हो रही है। उच्च गाइडलाइन दरों और परिणामी करों के कारण, आम नागरिकों, किसानों और व्यापारियों को आयकर अधिनियम 1961 के तहत अनावश्यक जुर्माना भरना पड़ेगा, जिससे व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित होंगी और निवेशक छत्तीसगढ़ की जगह अन्य राज्यों का रुख कर सकते हैं, जो राज्य के राजस्व और व्यापार के लिए हानिकारक होगा। भूमि संबंधी कार्य बंद होने से भूमि को नापने वाले इंजीनियर, गड्ढा खोदने वाले मजदूर, गोला बेचने वाले, जाली बेचने वाले दुकानदार आदि बड़े पैमाने पर बेरोजगार हो जाएंगे। गरीब किसान एवं आम जनता, जो बेटी की शादी, बीमारी, या कर्ज चुकाने जैसी आपातकालीन आवश्यकताओं के लिए भूमि बेचने पर निर्भर होते हैं, उनकी जरूरतें पूरी नहीं हो पाएंगी।



