नई दिल्ली : अमेरिका राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने 30 अनुभवी दूतावासों को उनके पद से हटा दिया है और उन्हें वापस बुला लिया है। जिन राजनयिकों को ट्रंप प्रशासन ने वापस बुलाया है, उनकी नियुक्ति बाइडन प्रशासन के समय हुई थी। ये सभी ट्रंप के दूसरे कार्यक्राल के दौरान भी बने हुए थे।
ट्रंप प्रशासन के इस कदम से विदेश नीति में बड़े बदलाव की तैयारी दिखाई दे रही है। इसलिए अपने राजनयिकों को राजदूत और अन्य वरिष्ठ दूतावास पदों से वापस बुला रहा है, ताकि ऐसे कर्मियों की नियुक्ति की जा सके जो राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट प्राथमिकताओं का पूरी तरह से समर्थन करते हों।
बता दें कि अमेरिकी राजदूत राष्ट्रपति की इच्छा के अनुसार कार्य करते हैं, हालांकि वे आमतौर पर तीन से चार साल तक अपने पद पर बने रहते हैं। नोटिस मिलने वाले इन सभी राजदूतों की ज्वाइनिंग बाइडेन के कार्यकाल के दौरान हुई थी। जिन्हें वापस बुलाने का फैसला लिया गया है। हालांकि फेरबदल से प्रभावित राजदूतों की विदेश सेवा की नौकरियां नहीं छिनेंगी, बल्कि वे चाहें तो अन्य कार्यभारों के लिए वाशिंगटन लौट सकेंगे।
एशिया में छह देशों- फिजी, लाओस, मार्शल आइलैंड्स, पापुआ न्यू गिनी, फिलीपींस और वियतनाम में तैनात अमेरिकी राजदूतों को भी बदला जा रहा है। वहीं, यूरोप में आर्मेनिया, नॉर्थ मैसेडोनिया, मोंटेनेग्रो और स्लोवाकिया इस सूची में शामिल हैं। इसके अलावा मध्य पूर्व के दो-दो देश (अल्जीरिया और मिस्र); दक्षिण और मध्य एशिया के दो-दो देश (नेपाल और श्रीलंका); और पश्चिमी गोलार्ध के दो-दो देश (ग्वाटेमाला और सूरीनाम) से भी करियर डिप्लोमैट्स को वापस बुलाया जा रहा है।



