प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है। प्रत्येक महीने के शुक्ल और कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष का व्रत किया जाता है। प्रदोष का दिन सप्ताह के जिस दिन पड़ता है उसका नाम उसी वार के हिसाब से रखा जाता है। अप्रैल में पहला प्रदोष व्रत बुधवार को रहेगा, इसलिए इसे बुध प्रदोष के नाम से जाना जाएगा। बुध प्रदोष व्रत करने से बुद्धि, वाणी और व्यवसाय के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है। बुध ग्रह को वाणी, बुद्धि, तर्क, संवाद, गणित, व्यापार आदि का कारक माना जाता है। इसलिए विद्यार्थियों एवं व्यापारियों के लिये यह व्रत विशेष रूप से फलदायक होता है। तो आइए जानते हैं कि अप्रैल में पहला प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।
अप्रैल प्रदोष व्रत 2026 डेट
पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का आरंभ 15 अप्रैल को मध्यरात्रि 12 बजकर 12 मिनट पर होगा। त्रयोदशी तिथि का समापन 15 अप्रैल को रात 10 बजकर 31 मिनट पर होगा।अप्रैल का पहला प्रदोष व्रत 15 अप्रैल 2026, बुधवार के दिन रखा जाएगा।
अप्रैल प्रदोष व्रत 2026 पूजा मुहूर्त
बुध प्रदोष पूजा के लिए शुभ मुहूर्त 15 अप्रैल को शाम 6 बजकर 56 मिनट से रात 9 बजकर 13 मिनट तक रहेगा। आपको बता दें कि भगवान शिव की पूजा के लिए प्रदोष काल यानी सूर्यास्त का समय सबसे ज्यादा उत्तम माना जाता है।
बुध प्रदोष व्रत का महत्व
बुध प्रदोष का व्रत करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है और संतान का स्वास्थ्य व करियर बेहतर होता है।। साथ ही रुके हुए सारे काम शीघ्र पूरे हो जाते हैं। यह व्रत ज्ञान, बुद्धि और सुख-शांति के लिए किया जाता है। वहीं जिन जातकों की कुंडली में बुध ग्रह कमजोर है या नीच का है, उन्हें इस व्रत से विशेष लाभ मिलता है। प्रदोष व्रत करने से घर में सुख-शांति आती है और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।



