देश की राजधानी दिल्ली इस समय जिस ठंड का सामना कर रही है, उसने न सिर्फ आम लोगों को हैरान कर दिया है बल्कि मौसम विज्ञानियों को भी नए सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया है. गलियों में सन्नाटा है, सड़कों पर धुंध की हल्की परत तैर रही है और सुबह-सुबह ठिठुरन इतनी तेज है कि लोग धूप निकलने का बेसब्री से इंतजार करते हैं. इस बार सर्दी केवल एक मौसम नहीं, बल्कि एक ऐसा अनुभव है, जिसने दिल्ली को पहाड़ों से भी ज्यादा ठंडा महसूस करा दिया है.
पहाड़ों से भी ज्यादा ठंडी हो रही दिल्ली:- आमतौर पर माना जाता है कि पहाड़ी इलाकों में ठंड ज्यादा होती है और मैदानी इलाके अपेक्षाकृत गर्म रहते हैं. लेकिन इस बार तस्वीर उलटी नजर आई. कई पर्वतीय शहरों में तापमान दिल्ली से ज्यादा रहा. इसका कारण यह है कि पहाड़ों में कभी-कभी पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से बादल और हल्की नमी तापमान को अत्यधिक गिरने से रोक लेते हैं, जबकि दिल्ली जैसे खुले मैदानी क्षेत्र में साफ आसमान, सूखी हवा और खुला भूभाग तापमान को तेजी से नीचे गिरने देता है. दिल्ली में खुले मैदान, कंक्रीट की सतहें और प्रदूषण के कण रात के समय गर्मी को वापस नहीं रोक पाते. नतीजा यह होता है कि धरती से गर्मी तेजी से निकल जाती है और वातावरण और ठंडा हो जाता है.
उत्तर प्रदेश भी ठंड की चपेट में:- दिल्ली के साथ-साथ उत्तर प्रदेश भी इस समय शीत लहर की गिरफ्त में है. लखनऊ, मेरठ, बहराइच जैसे शहरों में न्यूनतम तापमान सामान्य से काफी नीचे चला गया है. दिन में धूप निकलने से कुछ समय के लिए राहत जरूर मिलती है, लेकिन सुबह और रात की ठंड लोगों को कंपकंपा देती है. ग्रामीण इलाकों में कोहरे और गलन का असर ज्यादा दिखाई देता है. खेतों में काम करने वाले किसान, खुले में रहने वाले मजदूर और सड़क किनारे रहने वाले लोग इस ठंड से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं. आने वाले कुछ दिनों तक दिल्ली और उत्तर भारत में ठंड से बड़ी राहत मिलने की संभावना कम है. हल्की धूप जरूर लोगों को थोड़ी राहत दे सकती है, लेकिन पश्चिमी हवाओं और नमी के कारण ठंड बनी रह सकती है. फरवरी के पहले या दूसरे सप्ताह के बाद ही तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी की उम्मीद की जा सकती है. तब तक लोगों को सावधानी बरतने, गर्म कपड़े पहनने और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है.



