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केंद्रीय बजट जमीनी हकीकत से बिल्कुल अलग, आम आदमी को फिर हुई निराशा – अभिषेक वर्मा

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सुरेश मिनोचा मनेन्द्रगढ़ : केंद्रीय बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस के पूर्व पार्षद और पूर्व ब्लॉक कांग्रेस (शहरी) महामंत्री अभिषेक वर्मा ने कहा कि यह बजट काग़ज़ों और आंकड़ों में भले ही आकर्षक दिखता हो लेकिन जमीनी हकीकत से पूरी तरह अलग है। आम नागरिक, छोटे व्यापारी, किसान और युवा वर्ग को इस बजट से फिर एक बार निराशा ही हाथ लगी है।अभिषेक वर्मा ने कहा कि सरकार हर साल “विकास” और “आत्मनिर्भरता” की बात करती है लेकिन बजट में आम आदमी की जेब हल्की करने वाली नीतियाँ ज़्यादा और राहत देने वाले प्रावधान बेहद कम हैं। बढ़ती महंगाई के बावजूद मध्यम और निम्न वर्ग के लिये कोई ठोस कर राहत या दैनिक खर्च कम करने की योजना नहीं दिखाई देती। उन्होंने कहा कि शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के छोटे व्यापारियों को इस बजट से उम्मीद थी कि उन्हें सस्ते ऋण, टैक्स सरलीकरण और बाजार में स्थिरता मिलेगी लेकिन बजट में ऐसे वर्गों के लियेकोई प्रभावी नीति नज़र नहीं आती। बड़े उद्योगों को सुविधाएं दी गईं जबकि छोटे व्यवसाय हाशिए पर रह गए।

पूर्व पार्षद वर्मा ने ग्रामीण मुद्दों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि ग्रामीण रोजगार, कृषि लागत और किसान आय बढ़ाने के नाम पर केवल योजनाओं की पुनरावृत्ति की गई है। ना तो मनरेगा को मज़बूत करने का स्पष्ट रोडमैप है और ना ही किसानों की वास्तविक समस्याओं जैसे खाद, बीज और डीज़ल की बढ़ती कीमतों का समाधान। युवाओं को लेकर उन्होंने कहा कि बजट में रोजगार सृजन को लेकर ठोस विज़न का अभाव है। शिक्षा पूरी करने के बाद रोजगार की तलाश में भटक रहे युवाओं को केवल कौशल और स्टार्टअप के नाम पर आश्वासन दिये जा रहे हैं जबकि सरकारी और स्थायी नौकरियों पर कोई स्पष्ट नीति सामने नहीं आई।

अभिषेक वर्मा ने कहा कि एक जनप्रतिनिधि के रूप में उनका अनुभव रहा है कि नीति तभी सफल होती है जब उसका सीधा लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे लेकिन यह बजट उस कसौटी पर खरा नहीं उतरता। उन्होंने इसे “घोषणाओं का बजट, समाधान का नहीं” करार दिया। उन्होंने कहा कि जनता अब केवल भाषण नहीं बल्कि जमीनी बदलाव चाहती है और यदि सरकार आम लोगों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेती तो इसका जवाब आने वाले समय में जनता स्वयं देगी।

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