
राधेश्याम सोनवानी गरियाबंद : जिला मुख्यालय के स्वामी आत्मानद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम स्कूल मे प्राचार्य की कुर्सी को लेकर शिक्षक बटे दो खेमे मे कुछ शिक्षक प्राचार्य के पक्ष मे तो कुछ विपक्ष मे नजर आये,कुछ स्कूल मे चल रहे राजनीति का मजा लेते भी दिखे । स्टाप के ही कुछ पूर्वाग्रह से ग्रसित व अपने साथ बुरा होने की आशंका से ग्रसित होकर जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय पहुंच कर प्राचार्य को हटाने की माँग करने पहुंच गए। इस स्थिति को लेकर शिक्षको का पक्ष जानना चाहा तो शिक्षिका ने कहा की मैं स्टाप के साथ हूँ। बाकि एक शिक्षक ने अपने आप को मानसिक प्रताड़ित किया जाना बताया। जिसको लेकर कई सवाल के जवाब वो नहीं दे पाए। जबकि स्कूल के बच्चो से प्रत्यक्ष जाकर बात करने पर उन्होंने बताया की पुराने प्राचार्य श्रीमती वंदना पांडे के स्कूल मे आने से उनको खुशी हुई। बच्चो ने बताया की उनकी उपस्थिति मे शाला मे अनुशासन रहता हैं तथा शिक्षकीय कार्य अच्छे से चलता हैं हमें हमारे मैडम के वापस आने पर खुशी हुई। बच्चे से वार्तालाप के दौरान उन्हें बरगलाने बीच बीच मे शिक्षक पहुँचते रहे जिनको सामने देख कर बच्चे ठिठक जा रहे थे। जिसको देखकर ऐसा लगा कि बच्चों पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है।
इस मामले को लेकर सारा लब्बो लुबाब यह हैं की शाला की शिक्षक राजनीति के बीच किसी को बच्चो के बौद्धिक विकास और शैक्षणिक विकास को लेकर कोई जिम्मेदारी नहीं दिखी शिक्षक अपने पक्ष में बच्चों को करने के लिए व अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए बच्चों के दिमाग में जहर घोला जा रहा है। जबकि बच्चों की परीक्षा 20 फरवरी से शुरू होने वाली है छात्र-छात्राओं के लिए अभी का समय सबसे कीमती व उनके भविष्य की दिशा निर्धारित करने वाला है। प्राचार्य श्रीमती वंदना पांडे से इस संबंध में चर्चा करने पर उन्होंने कहा कि मुझे किसी से कोई आपत्ति नहीं है मैं ज्वाइन करने के बाद तुरंत पूरे स्टाफ की बैठक लेकर उन्हें अवगत करा दिया की परीक्षा नजदीक है बच्चों के छात्र-छात्राओं के हित में सभी अपना काम अच्छे से करें जिस की परीक्षा परिणाम शत प्रतिशत हो।
क्या कहता है नियम
आजादी से पूर्व फंडामेंटल रूल 1921 के नियम 14अनुसार कर्मचारी संहिता में निलंबन और धारणाधिकार को लेकर नियम बनाये गए है।धारणाधिकार का अर्थ, किसी सरकारी कर्मचारी का उस स्थायी पद पर अधिकार, जिस पर वह नियमित रूप से नियुक्त है। धारणाधिकार तब समाप्त होता है जब यदि कर्मचारी को स्थायी रूप से किसी अन्य पद पर नियुक्त कर दिया जाए या कर्मचारी स्वेच्छा से सेवा त्याग दे। यदि नियमों के अनुसार धारणाधिकार निलंबित किया जाए तो भी निलंबन की स्थिति में धारणाधिकार समाप्त नहीं होता कर्मचारी निलंबन के दौरान भी अपने मूल पद पर धारणाधिकार बनाए रखता है। चुकी निलंबन अस्थायी प्रशासनिक कार्रवाई है, दंड नही हैं। निलंबन के बाद बहाली होने पर कर्मचारी का अपने मूल पद पर धारणाधिकार पूरी तरह से सुरक्षित बना रहता है। इस संबंध में समय-समय पर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने भी अलग-अलग मामलों में व्याख्या दी की निलंबन अवधि में धारणाधिकार पद समाप्त नहीं होता बहाली के बाद पुनः धारणाधिकार पद पर ही नियुक्ति होती है।



