
रिपोर्टर मुन्ना पांडेय सरगुजा : सरगुजा जिले के एकीकृत महिला एवं बाल विकास परियोजना कार्यालय लखनपुर द्वारा संचालित कई आंगनबाड़ी केंद्रों के कार्यकर्ता जिला अथवा ब्लॉक मुख्यालय से बाहर निवास करती हैं। जिससे नियमित रूप से आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन नहीं हो पा रहा है। ब्लाक क्षेत्र में निवासरत आंगनबाड़ी केंद्र के हितग्राही गर्भवती , धात्री महिला और बच्चों को पूरक पोषण आहार रेडी टू -इट – फुड का लाभ नहीं मिल पा रहा है। विकासखंड लखनपुर के वनांचल ग्राम रेंम्हलां पुटुपारा और राई भवना आंगनबाड़ी केंद्र में पदस्थ कार्यकर्ता के आंगनबाड़ी से नदारद रहने का हैरत करने वाला तरीका सामने आया है। दरअसल ग्रामवासियों का आरोप है कि आंगनबाड़ी केंद्र पुटूपारा में पदस्थ ज्योति लकड़ा जो की जिला मुख्यालय अंबिकापुर में निवास करती हैं और अपने स्थान पर आंगनबाड़ी केंद्र में काम करने के लिए गांव के महिला शांति खेस को 1000 रूपये महीने में रखी है। आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन शांति खेस के द्वारा किया जाता है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अक्सर आंगनबाड़ी केंद्र से नदारत रहती हैं। वही दूसरा मामला गांव के ही राईभवना आंगनबाड़ी केंद्र का है जहां कार्यकर्ता पूजा यादव अपने मायके ग्राम बकमेर में निवास करती है। नियमित रूप से आंगनबाड़ी केंद्र नहीं खोलती बसाहट में निवास करने वाले विशेष आरक्षित राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले पहाड़ी कोरबा जनजाति के कुपोषित बच्चे ,गर्भवती महिलाओं को पूरक पोषण आहार रेडी टू इट फूड गरम भोजन जैसे शासकीय योजनाओं का लाभ सुचारू रूप से नहीं मिल पा रहा है। मौजूदा समय दो दिनों से आंगनबाड़ी केंद्र बंद पड़ा हुआ है।
जबकि केंद्र और राज्य सरकार विशेष आरक्षित जनजाति पहाड़ी कोरबाओं के लिए विभिन्न योजना चलाकर उन्हें संरक्षित सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है। परंतु आंगनबाड़ी केंद्र के बंद रहने और नियमित रूप से गर्म भोजन पूरक पोषण आहार अंडा आदि नहीं मिलने से आदीवासी पहाड़ी कोरवा जनजाति समुदाय के गर्भवती धात्री महिलाओं तथा बच्चों को महिला बाल विकास विभाग से मिलने वाली तमाम सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है ।बच्चे तथा महिला कुपोषण के शिकार हो रहे हैं। जिम्मेदार अफसरों की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है।अब देखने वाली बात होगी कि विभाग के आला अधिकारी इस मामले को लेकर किस प्रकार की कार्यवाही करते हैं। या ,फिर कार्यवाही के नाम पर महज नोटिस जारी कर खानापूर्ति कर दिया जाता है।
काबिले गौर है कि राई भावना स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में पहाड़ी कोरबा जनजाति के 6 माह से 3 वर्ष तक के दो बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित हैं ।तथा 3 वर्ष से 6 वर्ष तक के बच्चों में एक बच्चा गंभीर कुपोषण का शिकार है जिन्हें नियमित रूप से पूरक पोषण आहार रेडी टू इट फूड अंडा आदि मिलना निहायती जरूरी है। नहीं मिल पा रहा है।
बयान
ग्रामीण महिला शांति खेस
इस संबंध में आंगनबाड़ी केंद्र में काम करने वाली शांति खेस से बात करने पर उन्होंने बताया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के द्वारा 1000 रूपये महीने में उन्हें काम करने के लिए रखा गया है वह आंगनबाड़ी केंद्र की साफ सफाई बच्चों की देखरेख और भोजन बनाने का काम करती है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अंबिकापुर में निवास करती हैं। वह प्रतिदिन आंगनबाड़ी केंद्र आती है। 5 फरवरी दिन गुरुवार को मीटिंग होने के कारण आंगनबाड़ी केंद्र नहीं आई थी और 6 फरवरी दिन शुक्रवार को कार्यकर्ता आंगनबाड़ी केंद्र क्यों नहीं आई इस सवाल पर कहा उसको पता नहीं है आंगनबाड़ी कार्यकर्ता क्यों नहीं आई। उनसे मोबाइल से भी संपर्क नहीं हो पाया है बताई।इस संबंध में सुपरवाइजर अनीता क्रश, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पूजा यादव, ज्योति लकड़ा से मोबाइल फोन के माध्यम से संपर्क करने पर मोबाइल बंद होने कारण सम्बंधितो से संपर्क नहीं हो सका।
जिला कार्यक्रम अधिकारी जे0 आर0 प्रधान
जिला परियोजना अधिकारी जे0 आर0
प्रधान से मोबाइल के जरिए से संपर्क करने कोशिश की गई लेकिन सम्पर्क नहीं हो सका किन्हीं कारणों से उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
लखनपुर परियोजना अधिकारी —
इस संबंध में परियोजना अधिकारी असीम शुक्ला से बात करने पर उन्होंने कहा इन छोटी त्रुटियों पर ध्यान देने के लिए मैं अधिकृत नहीं हूं ।मैं कुछ नहीं कर सकता। यदि इस तरह की शिकायत आई है तो निश्चित तौर पर ग़लत है।पूरे मामले की जांच कराई जाएगी।



