
हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि बड़ी विशेष मानी गई है. ये तिथि भगवान शिव के रौद्र रूप कालभैरव देव को समर्पित की गई है. इस तिथि पर कालाष्टमी का व्रत रखा जाता है और विधि-विधान से कालभैरव देव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. कालभैरव देव से काल भी घबराता है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार, कालाष्टमी का व्रत करने से जीवन में खुशहाली आती है.इस दिन किया गया व्रत और पूजन जीवन के सारे संटकों से मुक्ति दिलाता है. कालाष्टमी के व्रत के प्रभाव से शुत्रुओं का भय खत्म हो जाता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि फरवरी माह में कालाष्टमी का व्रत किस दिन रखा जाएगा? साथ ही जानते हैं इसका शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व.
कालाष्टमी व्रत कब है:- फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि सोमवार 09 फरवरी को सुबह 05 बजकर 01 मिनट पर शुरू हो रही है. इस तिथि का समापन 10 फरवरी को सुबह 07 बजकर 27 मिनट पर होगा. कालाष्टमी पर निशा काल में कालभैरव देव की पूजा की जाती है. इसे देखते हुए 09 फरवरी को फाल्गुन माह की कालाष्टमी का व्रत रखा जाएगा.
कालाष्टमी शुभ मुहूर्त:- इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05 बजकर 21 मिनट से 06 बजकर 12 मिनट तक रहेगा. विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 26 मिनट से 03 बजकर 10 मिनट तक रहेगा. गोधूलि मुहूर्त शाम 06 बजकर 04 मिनट से 06 बजकर 30 मिनट तक रहेगा.निशिता मुहूर्त रात 12 बजकर 09 मिनट से 01 बजकर 01 मिनट तक रहेगा.
कालाष्टमी व्रत का महत्व:- भगवान कालभैरव को शिव जी के रौद्र रूप के साथ-साथ समय, न्याय और सुरक्षा के अधिपति माना गया है. मान्यता है कि कालाष्टमी के दिन पूजन और व्रत करने से बुरी शक्तियां पास नहीं आतीं. इसके अलावा शत्रुओं से मुक्ति मिलती है. साथ ही कालसर्प दोष, शनि और राहु के दुष्प्रभाव समाप्त हो जाते हैं.
कालाष्टमी पूजा विधि
- कालाष्टमी के दिन सबसे पहले सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें.
- इसके बाद पूजा स्थान पर दीपक जलाएं या कालभैरव के मंदिर जाएं.
- भगवान कालभैरव को धूप, दीप, फूल और फल अर्पित करें.
- भगवान कालभैरव का ध्यान करें.
- ॐ कालभैरवाय नमः मंत्र का जप करें.
- इस दिन उपवास रखें.



