
महासमुंद: राजस्व विभाग, पंचायत प्रतिनिधियों और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बुधवार को ग्राम पंचायत बेलसोंडा में करोड़ों रुपये की शासकीय भूमि पर हुए अतिक्रमण को प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर अतिक्रमण मुक्त किया। इस कार्रवाई के दौरान पूर्व सरपंच पति पोखन चंद्राकर ने विरोध का प्रयास किया, जिन्हें पुलिस ने बलपूर्वक मौके से हटाया। राजस्व रिकार्ड के अनुसार शासकीय भूमि खसरा नंबर 1661, 1651 और 1654 पर किए गए अवैध कब्जों को जमींदोज कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान पूर्व सरपंच भामिनी चंद्राकर के पति पोखन चंद्राकर द्वारा घेरी गई करीब 55 डिसमिल बेशकीमती शासकीय जमीन को मुक्त कराया गया। पंचायत प्रतिनिधियों के अनुसार, पूर्व सरपंच भामिनी चंद्राकर के कार्यकाल के दौरान इसी भूमि को कब्जा मुक्त रखने के बहाने निस्तारी तालाब के कुछ हिस्से को जेसीबी से समतल कर वहां पौधारोपण किया गया था। आरोप है कि बाद में पौधे नहीं लगे और उसी जमीन पर पूर्व सरपंच परिवार ने स्वयं कब्जा कर लिया। मौके पर राजस्व निरीक्षक और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तैनात रहे।
कब्जा नहीं मेरी निजी भूमि है, बंदोबस्त सुधार हेतु प्रस्तुत है आवेदन
प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई पर पोखन चंद्राकर ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि
वे स्वंय एक शासकीय कर्मचारी है तो क्यों वे शासकीय कार्य मे बाधा उतपन्न करेंगे। रही बात कार्रवाई के दौरान सामने आने की तो राजस्व निरीक्षक से केवल रिकार्ड दिखाने की मांग की थी। श्री चंद्राकर ने बताया कि जिस शासकीय भूमि पर कब्जे की बात कही जा रही है वह उनकी पैतृक जमीन है और उन्हें निशाने पर रखकर यह कार्रवाई की गई है।
जिस खसरा नंबर को शासकीय मद में दिखाया जा रहा है, उसमें बंदोबस्त त्रुटि है। री-नंबरिंग के दौरान हुई इस गलती के सुधार के लिए उन्होंने तहसील कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत किया है। उन्होंने शासकीय जमीन पर अतिक्रमण नहीं किया है। उन्होंने बताया कि पूर्व सरपंच भामिनी ने सदैव अतिक्रमण के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी है, ऐसे में वे स्वयं यह कैसे कब्जा कर सकतीं। इस मामले में नायब तहसीलदार आमिला से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया पर उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।



