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कानूनी लड़ाई पर ममता सरकार के खर्च पर उनकी ही पार्टी के नेता ने उठाए सवाल, RTI से ली जानकारी

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कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस के पूर्व राज्यसभा सदस्य जौहर सरकार ने अपनी ही सरकार के खर्चों पर सवाल उठाते हुए चौंकाने वाले आंकड़े साझा किए हैं। एक आरटीआइ से मिली जानकारी का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया है कि राज्य की ममता बनर्जी सरकार ने पिछले एक साल में नामी वकीलों को फीस के रूप में करोड़ों रुपये का भुगतान किया है।

जौहर सरकार के अनुसार, आरटीआइ कार्यकर्ता अमिताभ चौधरी द्वारा दायर आवेदन के जवाब में राज्य के विधि विभाग ने 2024-25 वित्त वर्ष का विवरण दिया है। इसके मुताबिक, वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल को पिछले एक साल में 3.16 करोड़ रुपये और अभिषेक मनु सिंघवी को 4.62 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।

इतना ही नहीं, आंकड़ों के अनुसार पिछले छह वर्षों में कुल 51 वकीलों की फीस पर सरकार ने करीब 87 करोड़, 77 लाख रुपये खर्च किए हैं।उन्होंने इन खर्चों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि सरकार को अपनी जुझारू मानसिकता छोड़कर सहानुभूति का रास्ता अपनाना चाहिए।

किया सवाल

उन्होंने सवाल किया कि क्या आरजी कर अस्पताल में महिला डाक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या मामले में न्याय दिलाना वाकई इतना कठिन है? क्या अस्पतालों में धांधली करने वालों को सजा नहीं मिलेगी? इतना पैसा वकीलों पर लुटाने के बजाय, क्या उन योग्य शिक्षकों के दुख को कम नहीं किया जा सकता था, जिन्होंने बिना रिश्वत दिए नौकरी पाई, फिर भी दर-दर भटक रहे हैं?

तृणमूल ने आरोपों को खारिज कियावहीं, तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष ने जौहर सरकार के आरोपों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में राज्य पर अत्यधिक दबाव बनाया है और केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है।

ऐसी स्थिति में राज्य के पक्ष को मजबूती से रखने के लिए बड़े वकीलों की सेवाएं लेना आवश्यक था। उन्हें जो भी पारिश्रमिक दिया गया है, वह उनके काम के अनुरूप उचित है और इसमें कोई अनियमितता नहीं है।

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