सनातन धर्म में वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि बहुत ही विशेष मानी जाती है. इस दिन गंगा सप्तमी का पर्व मनाया जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था. इसलिए इसे गंगा जयंती के नाम से भी जाना जाता है. हर साल इस पर्व पर श्रद्धालु गंगा स्नान, दान और पूजा करते हैं.धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान और पूजा करने से व्यक्ति के सभी पापों का नाश हो जाता है और पितरों को शांति प्राप्त होती है. हालांकि, इस साल गंगा सप्तमी के पर्व को लेकर लोगों के मन में संशय बना हुआ है. कुछ लोगों का मानना है कि इस साल गंगा सप्तमी 22 अप्रैल को मनाई जाएगी. वहीं कुछ लोग इस पर्व को 23 अप्रैल को मनाना शुभ मान रहे हैं. ऐसे में आइए जानते हैं गंगा सप्तमी की सही तारीख. साथ ही जानते हैं इसकी पूजा विधि और महत्व.
गंगा सप्तमी पूजा विधि:- गंगा सप्तमी के दिन सुबह जल्दी उठकर गंगा में स्नान करें. अगर यह संभव नहीं है, तो घर में ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल डाल लें. स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें. गंगा मां को फूल, अक्षत, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें. ‘ॐ नमो गंगायै विश्वरूपिणी नारायणी नमो नमः’ मंत्र का जाप करें. शाम के समय गंगा तट पर दीपदान करें. घर में गंगाजल से शुद्धिकरण करें और मां गंगा की आरती करें. जरूरतमंद लोगों को फल या अन्य वस्तुओं का दान करें.
गंगा सप्तमी का महत्व:- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राजा भगीरथ की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा पृथ्वी पर आईं थीं. भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में धारण किया था. ताकि उनके तेज वेग को नियंत्रित किया जा सके. इस दिन गंगा नदी में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है. इस दिन गंगा स्नान करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं.
गंगा सप्तमी कब है
1. वैशाख माह की कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि की शुरुआत 22 अप्रैल को रात 10 बजकर 50 मिनट पर होगी.
2. इस तिथि का समापन 23 अप्रैल को रात 08 बजकर 50 मिनट पर होगा.



