
सनातन धर्म में गणगौर के व्रत का विशेष महत्व है. गणगौर का व्रत हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है. ये व्रत हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश सहित उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में महिलाएं रखती हैं. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को रखने से वैवाहिक जीवन खुशहाल होता है और पति की आयु लंबी होती है. मान्यता है कि माता पार्वती ने गणगौर का व्रत करके शिव जी को पति के रूप में प्राप्त किया था.अविवाहित कन्याएं भी गणगौर का व्रत योग्य वर पाने की कामना से रखती हैं. गणगौर शब्द गण और गौर दो शब्दों से मिलकर बना है. जहां गण को भगवान शिव, वहीं गौर माता पार्वती को माना जाता है. हालांकि, इस साल लोगों के मन में गणगौर के व्रत को लेकर संशय है कि ये 20 को रखा जाएगा या 21 मार्च को. ऐसे में आइए जानते हैं इस व्रत की सही तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि.
गणगौर व्रत कब है:-इस साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 21 मार्च 2026 को सुबह 02 बजकर 30 मिनट पर शुरू हो रही है. वहीं इस तिथि का समापन इसी दिन रात में 11 बजकर 56 मिनट पर हो जाएगा. ऐसे में 21 मार्च, शनिवार को गणगौर व्रत रखा जाएगा.
गणगौर व्रत की पूजा विधि:- गणगौर व्रत के दिन स्नान करके शुद्ध कपड़े पहनें. फिर मंदिर में एक चौकी रखकर उस पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं. इसके बादचौकी पर एक थाली रखें और उस पर मिट्टी से गौरी और शिव जी की मूर्ति बनाएं. फिर हाथ जोड़कर व्रत का संकल्प लें. इसके बाद सुंदर वस्त्रों और आभूषणों से देवी-देवताओं की मूर्ति को सजाएं. मूर्ति के पास कलश की स्थापना करें और गौरी-शंकर जी की पूजा करें. उनको फूल, फल, अक्षत, मिठाई और धूप-दीप अर्पित करें. मंत्र जाप करने के बाद आरती करें. शाम को फिर से गण और गौर जी की पूजा करें. व्रत की कथा सुनने के बाद मूर्ति को किसी शुद्ध नदी में विसर्जित करें. पानी पीकर व्रत खोलें.
गणगौर व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त
- सूर्योदय- सुबह 06 बजकर 24 मिनट पर होगा.
- ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04 बजकर 49 मिनट से सुबह 05 बजकर 36 मिनट तक रहेगा.
- अभिजित मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 04 मिनट से दोपहर 12 बजकर 52 मिनट तक रहेगा.
- सायाह्न सन्ध्या मुहूर्त- शाम 06 बजकर 32 मिनट से शाम 07 बजकर 43 मिनट तक रहेगा.



