हिंदू कैलेंडर के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को ‘गुड़ी पड़वा’ के रूप में मनाया जाता है. यह पर्व मुख्य रूप से महाराष्ट्र, गोवा और कोंकण क्षेत्र में नव वर्ष के स्वागत के रूप में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है. वर्ष 2026 में यह पर्व 19 मार्च को मनाया जाएगा.
पूजा विधि और गुड़ी स्थापना:- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इस दिन घर के मुख्य द्वार पर आम के पत्तों का तोरण लगाया जाता है और सुंदर रंगोली बनाई जाती है. गुड़ी पड़वा का मुख्य आकर्षण ‘गुड़ी’ यानी पताका फहराना है. इसके लिए एक ऊँचे बांस पर सुंदर रेशमी वस्त्र बांधा जाता है. इस पर नीम की टहनियां, आम के पत्ते, फूलों की माला और शक्कर के खिलौनों की गाठी सजाई जाती है. सबसे ऊपर चांदी या तांबे का लोटा (कलश) उल्टा रखा जाता है. इसे घर के प्रवेश द्वार या खिड़की पर बाहर की ओर लगाया जाता
नीम और गुड़ का सेवन:- इस त्योहार पर नीम का सेवन अनिवार्य माना जाता है. नीम की कड़वी पत्तियों को गुड़ और अजवाइन के साथ मिलाकर प्रसाद के रूप में दिया जाता है. यह इस बात का प्रतीक है कि जीवन में सुख (गुड़) और दुख (नीम) दोनों होता है. साथ ही, आयुर्वेद के अनुसार वसंत ऋतु में नीम का सेवन रक्त को शुद्ध करता है और त्वचा रोगों से बचाता है. इस दिन भोजन में पूरण पोली और श्रीखंड जैसे पारंपरिक व्यंजन भी घर-घर में बनाए जाते हैं.
गुड़ी पड़वा 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त
- प्रतिपदा तिथि आरंभ: 19 मार्च, सुबह 6:52 बजे से
- प्रतिपदा तिथि का समाप्ति: 20 मार्च, सुबह 4:52 बजे तक
- गुड़ी स्थापना: 19 मार्च को की जाएगी
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:51 – 5:39 बजे
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2:30 – 3:18 बजे (शुभ कार्यों के लिए)
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:29 – 6:53 बजे (विशेष शुभ कार्यों के लिए)
- निशिता मुहूर्त: रात 12:05 – 12:52 बजे



