पटना में महज 12 दिनों में बैकलॉग का आंकड़ा 1.80 लाख के पार चला गया. क्या वाकई पटना में गैस खत्म होने वाली है या यह सिर्फ पैनिक बुकिंग का नतीजा है? या ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव की खबरों ने राजधानी में ऐसी अफवाह फैलाई कि लोग खाली सिलेंडर लेकर गैस एजेंसियों की ओर दौड़ पड़े.
अफवाहों ने बिगाड़ा सुकून:- पटना जिले में रोजाना करीब 32 हजार गैस सिलेंडरों की आपूर्ति हो रही है, जबकि बुकिंग की संख्या 40 हजार के आसपास पहुंच गई है. कुछ दिन पहले यह आंकड़ा 50 हजार से भी ऊपर चला गया था, जिससे सिस्टम पर दबाव बढ़ गया और बैकलॉग लगातार बढ़ता गया. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति में 20 प्रतिशत की कटौती की खबरों ने लोगों के मन में डर पैदा कर दिया. इसी आशंका में उन लोगों ने भी गैस बुक कराना शुरू कर दिया.
पटना में गैस का गणित:- पटना जिले में कुल 136 गैस एजेंसियां हैं जो करीब 16.65 लाख उपभोक्ताओं को सेवा देती हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार को कुल 40,773 लोगों ने गैस बुक कराई, जबकि औसत खपत 33,603 सिलेंडर प्रतिदिन है.
डीएम डॉ. त्यागराजन की अपील:- पटना के जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम और एडीएम सप्लाई रवींद्र कुमार दिवाकर ने स्थिति की समीक्षा करते हुए लोगों से संयम बरतने की अपील की है. प्रशासन का कहना है कि अगर मांग में इसी तरह कमी आती रही और वितरण सुचारू रहा, तो अगले 7 से 10 दिनों में स्थिति पूरी तरह सामान्य हो जाएगी. गैस वितरण की प्रक्रिया में किसी भी तरह का व्यवधान न डालें. यह समझना जरूरी है कि पैनिक बुकिंग की वजह से उन लोगों को परेशानी हो रही है जिन्हें वास्तव में सिलेंडर की तुरंत जरूरत है. प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि पटना में गैस की कोई स्थाई कमी नहीं है.



