राधेश्याम सोनवानी,गरियाबंद :- शहर के मेन रोड स्थित पुराने एसपी ऑफिस के सामने चेटीचंड महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया, जहां सिंधी समाज के सभी वर्गों के लोगों ने उत्साह और श्रद्धा के साथ भागीदारी निभाई। कार्यक्रम में भगवान झूलेलाल की विधिवत पूजा-अर्चना की गई, जिसके बाद मीठे शरबत और प्रसाद का वितरण कर आपसी भाईचारे का संदेश दिया गया। पूरे आयोजन स्थल पर भक्ति, उल्लास और एकता का अद्भुत संगम देखने को मिला।
चेटीचंड पर्व सिंधी समाज के आराध्य देव भगवान झूलेलाल के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है और इसी दिन से सिंधी नववर्ष की भी शुरुआत होती है। यह पर्व चैत्र शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि भगवान झूलेलाल का अवतार समाज में प्रेम, सद्भावना और भाईचारा स्थापित करने के लिए हुआ था।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, मिरखशाह नामक अत्याचारी शासक सिंधी समाज पर जबरन धर्म परिवर्तन का दबाव बना रहा था। इससे मुक्ति पाने के लिए समाज के लोगों ने वरुण देवता की आराधना की। 40 दिनों की कठोर तपस्या के बाद वरुण देव ने झूलेलाल के रूप में अवतार लेकर समाज को अन्याय और अत्याचार से मुक्ति दिलाई। इसी कारण इस दिन भगवान झूलेलाल की विशेष पूजा की जाती है।
सिंधी समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष अजय रोहरा ने कहा कि चेटीचंड केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और एकता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि भगवान झूलेलाल ने समाज को अन्याय के खिलाफ खड़े होने और आपसी भाईचारे के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया। आज के दौर में भी यह संदेश उतना ही प्रासंगिक है।उन्होंने आगे कहा कि प्राचीन समय में जब सिंधी व्यापारी जलमार्ग से लंबी यात्राएं करते थे, तब वे जल देवता झूलेलाल से सुरक्षित यात्रा की प्रार्थना करते थे। यात्रा सफल होने पर भगवान का आभार प्रकट किया जाता था। यह परंपरा आज भी समाज में आस्था और विश्वास के रूप में जीवित है।
समाज की युवा प्रतिनिधि सृष्टि रोहरा ने कहा कि चेटीचंड का पर्व नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का सबसे बड़ा अवसर है। उन्होंने बताया कि इस तरह के आयोजनों से बच्चों और युवाओं को अपनी संस्कृति, इतिहास और परंपराओं को समझने का मौका मिलता है। सृष्टि ने कहा कि आज के आधुनिक दौर में भी सिंधी समाज अपनी परंपराओं को संजोकर आगे बढ़ रहा है, जो गर्व की बात है। उन्होंने सभी से अपील की कि ऐसे आयोजनों में बढ़-चढ़कर भाग लें और समाज की एकता को और मजबूत करें।
कार्यक्रम में रामचंद्र मखीजा, अर्जुन रोहरा, रितेश रोहरा, शोभा रोहरा, आशीष रोहरा, सिया रोहरा, ग्रीशा रोहरा, आरती रोहरा, पूनम रोहरा, ज्योति रोहरा, मीना रोहरा, अंजली रोहरा, दिव्यम, प्रियम, किआरा, आभास, अंशिका, शौर्य, तृषा, ज्ञाना, समदृष्ट, गौतम माखीजा, सेवक माखीजा, कन्हैयालाल रोहरा, राकेश कुमार रोहरा, सुनील रोहरा, विकास रोहरा, रवि रोहरा और जयराम दास रोहरा सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।



