राधेश्याम सोनवानी,गरियाबंद :– ईद-उल-फितर के मौके पर जहां पूरा शहर खुशियों में डूबा नजर आया, वहीं एक नन्हे बच्चे की इबादत और हौसले की कहानी ने सभी का दिल छू लिया। महज़ 9 साल के ज़िशान मेमन ने इस बार पूरे 30 रोज़े रखकर एक मिसाल पेश की है। इतनी कम उम्र में पूरे रमजान भर रोज़ा रखना न केवल अनुशासन का प्रतीक है, बल्कि गहरी आस्था और मजबूत इरादों को भी दर्शाता है।
ज़िशान पिछले दो वर्षों से पूरे 30 रोज़ा रखने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन इस बार उन्होंने पूरे रमजान में एक भी रोज़ा नहीं छोड़ा। परिवार के अनुसार, उन्होंने पूरे नियम और समर्पण के साथ रोज़े रखे—सुबह सहरी के लिए समय पर उठना और पूरे दिन संयम बनाए रखना, यह सब उनके जज़्बे को दिखाता है।
ईद के दिन ज़िशान ने अपने माता-पिता आबीद मेमन और रेहाना मेमन के साथ मिलकर नमाज अदा की और फिर पूरे परिवार के साथ ईद की खुशियां मनाईं। नए कपड़ों में सजे ज़िशान के चेहरे पर संतोष और खुशी साफ झलक रही थी। मोहल्ले और रिश्तेदारों ने भी उनकी इस उपलब्धि की सराहना की और उन्हें दुआएं दीं।
ज़िशान के पिता आबीद मेमन ने भावुक होकर कहा,
“इतनी छोटी उम्र में बेटे का इस तरह पूरे 30 रोज़े रखना हमारे लिए गर्व की बात है। हमने उसे कभी मजबूर नहीं किया, यह उसकी अपनी इच्छा और लगन थी। उसे रोज़ा रखते देख हमें भी सब्र, अनुशासन और ईमान की असली ताकत का एहसास हुआ। जब वह पूरे दिन बिना शिकायत के रोज़ा रखता था, तो दिल भर आता था। आज ईद के दिन उसकी खुशी देखकर हमारी सारी मेहनत सफल लग रही है।”
मां रेहाना मेमन ने भी बताया कि ज़िशान ने पूरे महीने बेहद लगन से रोज़े रखे और कभी थकान या कमजोरी की शिकायत नहीं की। परिवार ने भी उसे पूरा सहयोग दिया, जिससे वह अपने इरादे पर कायम रह सका।
ज़िशान की यह कहानी न सिर्फ बच्चों के लिए प्रेरणा है, बल्कि बड़ों के लिए भी एक संदेश है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो उम्र मायने नहीं रखती। गरियाबंद में ईद के इस खास मौके पर ज़िशान की यह छोटी-सी लेकिन बड़ी उपलब्धि हर किसी के चेहरे पर मुस्कान और दिल में गर्व का अहसास छोड़ गई।



