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बच्चे का पलटकर जवाब देना सिर्फ बदतमीजी नहीं है: इन 5 शुरुआती लक्षणों पर भी करें गौर

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 अक्सर माता-पिता की यह शिकायत होती है कि उनका बच्चा अब पलटकर जवाब देने लगा है या बात-बात पर बहस करने लगा है। कई बार हम इसे सीधे तौर पर ‘बदतमीजी’ या ‘संस्कारों की कमी’ मान लेते हैं और तुरंत गुस्सा करने लगते हैं।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसके पीछे कोई और वजह भी हो सकती है? जी हां, बच्चों का जुबान लड़ाना सिर्फ एक बुरा बर्ताव नहीं है, बल्कि यह उनकी किसी अंदरूनी परेशानी का संकेत भी हो सकता है। आइए जानते हैं उन 5 शुरुआती लक्षणों के बारे में, जिन पर ध्यान देना बहुत जरूरी है।

बहुत ज्यादा थकान या नींद पूरी न होनाबड़ों की तरह बच्चों को भी थकान होती है, लेकिन वे इसे सही शब्दों में बयां नहीं कर पाते। अगर बच्चा दिन भर स्कूल, ट्यूशन और खेलने-कूदने में बहुत ज्यादा थक गया है या उसकी नींद पूरी नहीं हुई है, तो उसका चिड़चिड़ा होना स्वाभाविक है। ऐसे में जब आप उससे कोई काम कहते हैं, तो वह झल्लाहट में पलटकर जवाब दे सकता है।

अपनी भावनाओं को न समझा पानाकई बार बच्चे स्कूल में किसी बात को लेकर, दोस्तों से झगड़े के कारण या पढ़ाई के दबाव की वजह से अंदर ही अंदर परेशान होते हैं। जब वे अपनी इन भावनाओं (डर, गुस्सा, या उदासी) को सही तरीके से जाहिर नहीं कर पाते, तो यह उनके व्यवहार में कड़वाहट के रूप में बाहर आता है। उनका पलटकर जवाब देना दरअसल उनके अंदर चल रही उथल-पुथल का एक सीधा नतीजा हो सकता है।

आपका ध्यान खींचने की कोशिशबच्चों के लिए माता-पिता का ध्यान सबसे ज्यादा मायने रखता है। अगर उन्हें लगता है कि आप अपने काम या फोन में ज्यादा व्यस्त हैं और उन्हें समय नहीं दे रहे हैं, तो वे आपका ध्यान खींचने के लिए नकारात्मक तरीके अपना सकते हैं। उनके दिमाग में यह बात बैठ जाती है कि जब वे कुछ गलत कहेंगे, तभी आप उनकी तरफ देखेंगे और उनसे बात करेंगे, भले ही वह डांट के रूप में ही क्यों न हो।

अपनी आजादी और खुद को साबित करने की चाहजैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं (खासकर 8-12 साल की उम्र में), वे खुद फैसले लेना चाहते हैं। वे जताना चाहते हैं कि अब वे छोटे बच्चे नहीं रहे। जब आप हर छोटी बात पर उन्हें टोकते हैं या उनके फैसले में दखल देते हैं, तो उन्हें लगता है कि उनकी आजादी छिन रही है। इसी आजादी को बचाने और खुद को साबित करने की कोशिश में वे पलटकर जवाब देने लगते हैं।

आस-पास के माहौल या बड़ों की नकल करनाबच्चे वही सीखते हैं जो वे देखते हैं। अगर घर में बड़े एक-दूसरे से ऊंची आवाज में बात करते हैं या बहस करते हैं, तो बच्चा भी उसी तरीके को अपना लेता है। इसके अलावा, टीवी शोज, कार्टून या दोस्तों के बीच अगर इस तरह की भाषा का इस्तेमाल हो रहा है, तो बच्चे बिना इसका असली मतलब समझे इसकी नकल करने लगते हैं।

अगली बार जब आपका बच्चा पलटकर जवाब दे, तो तुरंत डांटने या मारने के बजाय थोड़ा रुकें। शांति से यह समझने की कोशिश करें कि आखिर उसे किस बात की परेशानी है। प्यार और सही बातचीत से इस समस्या को बहुत आसानी से सुलझाया जा सकता है।

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