नवरात्र के पांचवें दिन मां दुर्गा के ममतामयी स्वरूप ‘मां स्कंदमाता’ की पूजा-आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता को केले का भोग सबसे ज्यादा प्रिय है। कहा जाता है कि माता को केले का प्रसाद चढ़ाने से वे बहुत जल्द प्रसन्न होती हैं और घर-परिवार में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।
वैसे तो आप मां को सीधे फल के रूप में भी केले का भोग लगा सकते हैं, लेकिन इस बार क्यों न माता रानी के लिए कुछ खास तैयार किया जाए? जी हां, 23 मार्च को आप मां स्कंदमाता को प्रसन्न करने के लिए घर पर ही बेहद स्वादिष्ट ‘केले का हलवा’ बना सकते हैं।
यह फलाहारी हलवा बनाने में जितना आसान है, खाने में उतना ही लाजवाब लगता है। व्रत रखने वालों के लिए भी यह एक बेहतरीन और ताकत देने वाली डिश है। आइए जानते हैं इसे बनाने की बहुत ही आसान रेसिपी।
केले का हलवा बनाने के लिए जरूरी सामग्री
- 4-5 ज्यादा पके हुए केले
- 2 से 3 बड़े चम्मच शुद्ध देसी घी
- आधा कप चीनी (आप अपने स्वादानुसार कम या ज्यादा कर सकते हैं)
- आधा चम्मच पिसी हुई छोटी इलायची
- बारीक कटे हुए मेवे (काजू, बादाम और पिस्ता)
- थोड़ा-सा दूध (जरूरत के अनुसार)
केले का हलवा बनाने की विधि
- सबसे पहले सभी पके हुए केलों को छील लें और एक बर्तन में रखकर उन्हें अच्छी तरह से मैश लें। आप चाहें तो इन्हें मिक्सी में भी पीस सकते हैं, लेकिन हाथ से मैश किए हुए केलों का हलवा ज्यादा दानेदार और स्वादिष्ट बनता है।
- अब गैस पर एक पैन या कड़ाही रखें और उसमें देसी घी डालें। जब घी पिघलकर हल्का गर्म हो जाए, तो उसमें मैश किए हुए केले डाल दें।
- गैस की आंच को मध्यम या धीमा रखें और केलों को घी में अच्छी तरह भूनें। इसे लगातार कलछी से चलाते रहें ताकि केले बर्तन की तली में न चिपकें। इसे तब तक भूनना है जब तक कि केले का रंग हल्का सुनहरा भूरा न हो जाए और उसमें से भुनने की सोंधी खुशबू न आने लगे।
- जब केले अच्छी तरह भुन जाएं और घी छोड़ने लगें, तब उसमें चीनी मिला दें। चीनी के पूरी तरह पिघलने तक इसे लगातार चलाते रहें। अगर इस समय आपको हलवा बहुत ज्यादा गाढ़ा या सूखा लग रहा हो, तो आप इसमें दो-चार चम्मच दूध भी मिला सकते हैं।
- जब हलवा सही गाढ़ेपन पर आ जाए, तो इसमें पिसी हुई इलायची और अपने मनपसंद कटे हुए मेवे डाल दें। सब कुछ अच्छी तरह मिलाएं और 1-2 मिनट पकाने के बाद गैस बंद कर दें।
- लीजिए, मां स्कंदमाता को भोग लगाने के लिए आपका गरमा-गरम और स्वादिष्ट ‘केले का हलवा’ बिल्कुल तैयार है। पूजा के समय माता रानी को पूरे भक्ति भाव से इसका भोग लगाएं और फिर परिवार के साथ प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।



