नई दिल्ली : मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच तेल सप्लाई पर संकट के बीच दुनिया भर के देशों के रणनीतिक तेल भंडार फिर चर्चा में आ गए हैं। ये भंडार ऐसे आपातकालीन स्टॉक होते हैं, जिनका इस्तेमाल युद्ध, सप्लाई रुकने या कीमतों में उछाल के समय किया जाता है।
ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को ठप कर देने के बाद वैश्विक तेल सप्लाई और गैस सप्लाई में बाधा आई है, जिसके बाद कई देशों ने आर्थिक संकट से बचने के लिए अपने रणनीतिक तेल भंडारों का उपयोग करना शुरू कर दिया है।
क्या होते हैं रणनीतिक तेल भंडार?रणनीतिक तेल भंडार वे स्टॉक होते हैं जिन्हें सरकारें विशेष रूप से संकट के समय उपयोग के लिए सुरक्षित रखती हैं। इनका उद्देश्य अर्थव्यवस्था को झटकों से बचाना होता है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के सदस्य देशों को कम से कम 90 दिनों के आयात के बराबर तेल रखना होता है। इन्हें भूमिगत कैवर्न या बड़े टैंकों में संग्रहित किया जाता है।
आइए जानते हैं किन देशों के पास सबसे बड़े रणनीतिक भंडार?
- चीन: चीन अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी का सदस्य नहीं है, लेकिन वह तेजी से बड़ा भंडार बना रहा है। चीन के पास दुनिया का सबसे बड़ा रणनीतिक तेल भंडार है। चीन के पास करीब 900 मिलियन बैरल कच्चा तेल मौजूद है।
- अमेरिका: अमेरिका के पास दुनिया का सबसे बड़ा रणनीतिक तेल भंडार है। अमेरिका के पास लगभग 415 मिलियन बैरल तेल स्टॉक में है। हाल की दिनों में तेल की कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए अपने भंडार से तेल जारी किया था।
- ब्रिटेन: 26 फरवरी तक, UK के ऊर्जा सुरक्षा और नेट जीरो विभाग के अनुसार, UK के पास रणनीतिक रिजर्व के तौर पर लगभग 38 मिलियन बैरल कच्चा तेल और 30 मिलियन बैरल रिफाइंड उत्पाद मौजूद हैं। माना जाता है कि ये रिजर्व लगभग 90 दिनों तक चल सकते हैं।
- जापान: जापान के पास करीब 300 मिलियन बैरल से अधिक तेल स्टॉक में है, जो लगभग 200 से ज्यादा दिनों तक सप्लाई बनाए रखने की क्षमता को दर्शाता है।
- दक्षिण कोरिया: दक्षिण कोरिया के पास मजबूत ओद्योगिक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा रणनीतिक तेल भंडार है, जिसका लगभग 100 मिलियन बैरल के आसपास स्टॉक है।
- भारत:भारत ने भी अपने रणनीतिक भंडार तेजी से विकसित किए हैं। ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने के लिए इन्हें लगातार विस्तार दे रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत के पास करीब 39 मिलियन बैरल तेल है।
- यूरोपिय यूनियन: EU के सदस्य देश, जिनमें जर्मनी, फ्रांस, स्पेन और इटली शामिल हैं, ये सभी IEA के सदस्य भी हैं। इनके पास भी रणनीतिक तेल भंडार हैं।
- जर्मनी: जर्मनी के अर्थव्यवस्था मंत्रालय के अनुसार, जर्मनी के पास 110 मिलियन बैरल कच्चा तेल और 67 मिलियन बैरल तैयार पेट्रोलियम उत्पाद हैं, जो सरकार के पास सुरक्षित हैं और जिन्हें कुछ ही दिनों में जारी किया जा सकता है।
- फ्रांस: फ्रांस ने 2024 के अंत में अपने रिज़र्व में लगभग 120 मिलियन बैरल कच्चे और तैयार उत्पादों की जानकारी दी थी; यह सबसे नया सार्वजनिक रूप से उपलब्ध डेटा है।
वैश्विक संकट में क्यों बढ़ जाती है इनकी अहमियत?हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान संकट के चलते वैश्विक सप्लाई प्रभावित होने पर कई देशों ने अपने भंडार खोलने की योजना बनाई। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी देशों ने मिलकर 400 मिलियन बैरल तेल रिलीज करने का फैसला किया है। इसका मकसद बाजार में स्थिरता लाना और कीमतों को काबू में रखना है।



